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'सरबजीत जैसे क़ैदियों को रिहा कर दें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष अस्मा जहाँगीर का कहना है कि पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय सरबजीत सिंह जैसे क़ैदियों को रिहा कर दिया जाना चाहिए या कम से कम उन्हें मौत की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए. बीबीसी हिंदी सेवा से एक विशेष बातचीत में उन्होंने संकेत दिए कि सरबजीत सिंह के ख़िलाफ़ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और उन्हें जिस तरह से फाँसी की सज़ा सुनाई गई है उस पर उन्हें हैरत हुई है. उन्होंने कहा, "उनके ख़िलाफ़ जो एफ़आईआर है, वह एक ब्लाइंड एफ़आईआर है, यानी किसी घटना के बाद कहा जाता है कि इसके लिए अज्ञात लोग ज़िम्मेदार हैं. एफ़आईआर मे उनका नाम नहीं है." अस्मा जहाँगीर ने कहा, "अगर आप केस को देखें तो एक ब्लाइंड एफ़आईआर में, एक व्यक्ति के इक़बालिया बयान के आधार पर, ऐसा बयान जो आठ दिन की हिरासत के बाद लिया गया हो, मैंने पहले कभी नहीं देखा कि ऐसे केस में किसी को फाँसी की सज़ा हुई हो." उन्होंने कहा, "सिस्टम ही हमारा ऐसा है कि इंसान को अफ़सोस होता है, मेरा दिल तो करता है कि ऐसी इल्तजा की जाए कि सरबजीत सिंह सहित ऐसे सारे क़ैदियों को छोड़ दिया जाए, नहीं तो कम से कम उनकी जान न ली जाए." उन्होंने पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा, "जिस तरह से हमारे जज साहेबान फटाफट मौत की सज़ा दे देते हैं, किसी को संदेह का लाभ तक नहीं देते, यह बहुत तक़लीफ़देह सूरतेहाल है." अस्मा जहाँगीर का कहना था, "इसमें कोई ज़िद की बात नहीं होनी चाहिए, ये क़ैदी हैं जो अपने देश से आकर दूसरे देश की जेल में बंद हैं, मैंने ऐसे बहुत से भारतीय क़ैदी देखे हैं जो अपनी सज़ा काट चुके हैं लेकिन अब भी पाकिस्तान की जेल में बंद हैं, इसी तरह पाकिस्तानी क़ैदियों के भी भारत की जेलों में बंद होने की रिपोर्टें हैं." पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष का मानना है कि "इन लोगों की रिहाई होनी चाहिए, इसी तरह तो दोनों देशों के बीच सदभाव को बढ़ावा मिलेगा." वर्ष 2000 से ही पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के साथ सरबजीत सिंह के परिवार का पत्राचार चल रहा है तब से वे इस मामले पर नज़र रख रही हैं. मुलाक़ात इस बीच, आज पाकिस्तान में तैनात भारत के दो वरिष्ठ अधिकारी सरबजीत सिंह से लाहौर स्थित कोट लखपत जेल में मुलाक़ात करेंगे. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नईम ख़ान ने कहा, "सरबजीत सिंह उर्फ़ मंजीत सिंह से दो भारतीय अधिकारी स्थानीय समय के अनुसार 1130 बजे मुलाक़ात करेंगे." दीपक कौल और एससी शर्मा नाम के ये दोनों अधिकारी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में कार्यरत हैं और वे सोमवार की रात को ही लाहौर के लिए रवाना हो गए हैं. दोनों अधिकारी अपने साथ एक स्थानीय फ़ोटोग्राफ़र को भी ले जाएँगे ताकि सरबजीत सिंह की तस्वीरें खींची जा सकें, इस मुलाक़ात का मक़सद यही है कि सरबजीत सिंह की राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा सके, यानी भारत पक्के तौर पर कह सके कि वे भारतीय हैं. |
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