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पैंतीस साल बाद कश्मीर आज़ाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में क़रीब 35 वर्षों से जेल में बंद भारतीय क़ैदी कश्मीर सिंह को रिहा कर दिया गया है. 35 साल पहले कश्मीर सिंह को जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था और मौत की सज़ा सुनाई गई थी. 60 वर्षीय कश्मीर सिंह लाहौर जेल में बंद थे. कोट लखपत जेल के अधीक्षक जावेद लतीफ़ ने बताया कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के आदेश के बाद कश्मीर सिंह को रिहा किया गया. रिहाई के बाद कश्मीर सिंह का कहना था, "मैं बेहतर महसूस कर रहा हूँ. मैं खुश हूँ." पाकिस्तान में मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी के मुताबिक़ कश्मीर सिंह मंगलवार को वाघा में अपने परिवारजनों से मिल पाएँगे. पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले कश्मीर सिंह पहले पुलिस में थे लेकिन बाद में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक सामनों की ख़रीद-बिक्री शुरू कर दी. इसी क्रम में उन्हें पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में 1973 में गिरफ़्तार किया गया था. लाहौर की एक सैनिक अदालत ने कश्मीर सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी. लेकिन पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी का कहना है कि 70 के दशक में ही कश्मीर सिंह की सज़ा पर सरकार ने रोक लगा दी थी. पहचान उन्होंने बताया कि उस समय से कश्मीर सिंह का मामला अधर में था. अपनी गिरफ़्तारी के बाद शुरू में तो कश्मीर सिंह अपने परिवारजनों से पत्राचार के ज़रिए जुड़े हुए थे. लेकिन 24 साल से उनका ये संपर्क भी टूटा हुआ था. इस दौरान उन्हें पाकिस्तान की कई जेलों में रखा गया. जेल में कश्मीर सिंह को इब्राहिम के नाम से जाना जाता था. इस कारण जब मंत्री अंसार बर्नी उनका अता-पता जानने निकले तो उन्हें काफ़ी परेशानी हुई. पिछले साल दिसंबर में मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी कश्मीर सिंह को पहचान पाए. इसके बाद ही उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से अपील की कि मानवाधिकार के आधार पर कश्मीर सिंह को रिहा कर दिया जाए. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने उनकी अपील को स्वीकार किया और रिहा करने के आदेश जारी कर दिए. अब अंसार बर्नी कश्मीर सिंह के साथ भारत जा रहे हैं. लेकिन क्यों, इसका जवाब वे इन शब्दों में देते हैं- भारत जाने का मेरा मक़सद सिर्फ़ ये है कि मैं अपनी आँखों से वो क्षण देखना चाहता हूँ जब कश्मीर सिंह अपने परिवारजनों से मिलेंगे. जासूसी दोनों देशों के बीच 1965 और 1971 के जंग के दौरान सैंकड़ों लोगों की गिरफ़्तारी हुई और वे एक-दूसरे देश की जेलों में भेज दिए गए.
कश्मीर सिंह को भी 1973 में रावलपिंडी से गिरफ़्तार किया गया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन पर भारत के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया. पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार में मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी को सबसे पहले रेडियो पर प्रसारित एक टॉक शो से कश्मीर सिंह के बारे में पता चला. बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि कश्मीर सिंह अपनी पत्नी और बच्चों से मगंलवार सुबह मिल पाएंगे. प्रेम विवाह कश्मीर सिंह ने अंसार बर्नी को कई रोचक जानकारियाँ दी हैं. उन्होंने बताया कि उनका प्रेम विवाह हुआ था. जब बर्नी ने कश्मीर सिंह की पत्नी परमजीत कौर से टेलीफ़ोन पर बात की तो इसकी पुष्टि हो गई. वो कहती हैं, "अगर ऐसा नहीं होता तो मैं 35 वर्षों से उनके लिए इंतज़ार क्यों करती."
स्थानीय मीडिया का कहना है कि जब से कश्मीर की पत्नी को रिहाई के फ़ैसले के बारे में पता चला, तभी से वो भारत-पाकिस्तान सीमा पर इंतज़ार कर रही है. अंसार बर्नी ने बताया कि कश्मीर सिंह ज़्यादातर जेल की तंग कोठरी में रखे जाते थे क्योंकि उन्हें सज़ा हो चुकी थी और वे मानसिक तौर पर भी बीमार हो गए थे. बर्नी बताते हैं कि कई वर्षों पहले उन्हें ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के लोगों ने कश्मीर के बारे में बताया. जेल सुधारों के लिए काम करने वाले बर्नी बताते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान के बीस जेलों का दौरा किया लेकिन कहीं भी कश्मीर सिंह का नामोनिशान नहीं मिला. उन्होंने बताया कि वर्षों से कोई भी व्यक्ति कश्मीर सिंह से मिलने नहीं आया और ना ही उन्होंने खुली आकाश में साँस ली है. जिस तरह की तंग कालकोठरी में वो रह रहे थे उसे बर्नी ने 'दुनिया में नर्क' की तरह बताया. |
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