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सरबजीत के मामले का गवाह मुकर गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में क़ैद सरबजीत सिंह के मामले में रविवार को एक नया मोड़ आ गया है. सरबजीत को मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है लेकिन जिस विस्फोट के मामले में यह सज़ा सुनाई गई है उसका मुख्य गवाह अपने बयान से मुकर गया है. अब मुख्य गवाह ने कहा है कि वह सरबजीत सिंह को नहीं जानता और जिस समय विस्फोट हुआ उस समय वह बेहोश हो गया था इसलिए उसने किसी को नहीं देखा था. सलीम शौकत नाम के इस गवाह ने भारत के दो प्रमुख टेलीविज़न चैनलों को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि उन पर इस तरह की गवाही देने के लिए सरकारी वकील और पुलिस ने दबाव डाला था. उन्होंने कहा, "मुझसे सरकारी वकील ने कहा था कि मैं सरबजीत को विस्फोट के मुख्य अभियुक्त के रुप में पहचान लूँ और मैंने अदालत में वही किया." उल्लेखनीय है कि 18 मई 1990 को लाहौर के एक सिनेमाघर के सामने विस्फोट हुआ था और सरबजीत पर आरोप है कि वह भारत के एक जासूस की तरह पाकिस्तान आया था और विस्फोट का मुख्य अभियुक्त था. इस विस्फोट में सलीम शौकत के पिता शौकत जान की मौत हो गई थी. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अदालत में यह बयान दिया तो सरबजीत ने उन्हें चुनौती दी थी कि वे क़ुरान पर हाथ रखकर ये बयान दें पर उन्होंने इसे टाल दिया था. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सरबजीत के वकील अब्दुल हमीद राणा ने कहा है कि वे मुख्य गवाह के इस ताज़ा बयान की प्रति भी पुनर्विचार याचिका में लगा रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि इससे सहायता मिलेगी. उल्लेखनीय है कि सरबजीत के बारे में उनके परिवारजनों का कहना है कि उस ग़लत पहचान के आधार पर गिरफ़्तार किया गया है. परिवारजनों की अपील पर सरबजीत की सज़ा पर पुनर्विचार करने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन से कई स्तरों पर अपील की गई है. इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्री नटवर सिंह ने भी हस्तक्षेप किया है. |
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