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पीपीपी को झटका, एमक्यूएम विपक्ष में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से मतभेद की वजह से केंद्र या सिंध की सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता फ़ारूक़ सत्तार ने इस फ़ैसले की घोषणा की है. उनका कहना है कि लंदन में निर्वासन में रह रहे पार्टी के प्रमुख अल्ताफ़ हुसैन ने इस निर्णय का अनुमोदन कर दिया है. दोनों दलों के बीच सिंध प्रांत में कुछ अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर मतभेद बढ़ रहे थे. विवाद को ख़त्म करने के लिए पीपीपी नेता आसिफ़ अली ज़रदारी पिछले दिनों एमक्यूएम के दफ़्तर भी गए थे लेकिन वे एमक्यूएम को नहीं मना सके. एमक्यूएम नेता सत्तार ने कहा है कि उनकी पार्टी केंद्र और सिंध प्रांत में विपक्ष में बैठेगी. कराची में पार्टी कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में सत्तार ने कहा, "मौजूदा हालात और हमारी आपत्तियों को निबटाने में पीपीपी की अक्षमता को देखते हुए हमने तय किया है कि हम किसी गठबंधन में नहीं शामिल होंगे और न ही केंद्र या सिंध की सरकार में सत्ता के साझीदार बनेंगे." विवाद से विखराव एमक्यूएम को सिंध प्रांत में कुछ अधिकारियों की तैनाती पर गहरी आपत्ति है जिसमें वहाँ के आईजी डॉ. शोएब सडल भी हैं.
सत्तार ने कहा कि पार्टी हाल में की गई नियुक्तियों से नाख़ुश है. आईजी शोएब से एमक्यूएम को ख़ास दिक्कत है. सत्तार का कहना है कि उनके पार्टी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ अभियान चलाने में शोएब की अहम भूमिका रही है. सत्तार ने कहा कि पीपीपी नेताओं से उनकी पार्टी ने इस तरह की और भी नियुक्तियों के बार में अपनी चिंता से अवगत करा दिया था. उन्होंने कहा, "पीपीपी नेताओं से हमारी कई दौर की बातचीत हुई लेकिन उनकी तरफ़ से बातचीत को बहुत हल्के से लिया गया." पीपीपी और एमक्यूएम वैसे पारंपरिक रूप से एक-दूसरे की विरोधी रही हैं. व्यापारिक शहर कराची में एमक्यूएम का दबदबा है. 'हिंसा बर्दाश्त नहीं...'
दोनों के रिश्ते किस हद तक ख़राब रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की स्वदेश वापसी के तुरंत बाद कराची में हुए विस्फ़ोट के लिए पीपीपी ने एमक्यूएम पर आरोप लगाए थे. कुछ दिन पहले तक राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की समर्थक रही एमक्यूएम के साथ पीपीपी के रिश्ते सुधर रहे थे. लेकिन पिछले सप्ताह कराची में एमक्यूएम समर्थक और सरकार समर्थक वकीलों के बीच हिंसक झड़प के बाद से दोनों के बीच की दूरी फिर बढ़ने लगी थी. इस बीच पीपीपी नेता और देश की सूचना मंत्री शेरी रहमान ने कहा है कि एमक्यूएम अपने फ़ैसले लेने के आज़ाद है लेकिन देश टकराव और हिंसा को बर्दाश्त नहीं कर सकता. शेरी ने कहा, "पीपीपी ने अपनी तरफ़ से उन्हें साथ लाने की भरसक कोशिश की लेकिन अगर वे विपक्ष में बैठना चाहते हैं तो यह उनका अधिकार है." उन्होंने कहा, "हम उनसे सकारात्मक व्यवहार की उम्मीद करते हैं. दंगों और आगजनी की राजनीति की यहाँ कोई जगह नहीं है." |
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