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नेपाल में माओवादी बहुमत की ओर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल से मिली ताज़ा ख़बरों के मुताबिक़ संविधान सभा के चुनाव में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) स्पष्ट बहुमत हासिल करने की ओर बढ़ती नज़र आ रही है. अब तक घोषित 162 सीटों में 89 सीटें माओवादियों ने जीती हैं. दूसरे नंबर पर चल रही पार्टी नेपाली कांग्रेस माओवादियों से बहुत पीछे चल रही है. इस संविधान सभा को अगले दो साल में नेपाल का नया संविधान लिखना है और ज़रूरत पड़ने पर इसका कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है. माना जा रहा है कि संविधान सभा में बहुमत मिलने के बाद माओवादी 240 साल पुरानी राजशाही को पूरी तरह ख़त्म कर देंगे. माओवादियों के ज़बर्दस्त प्रदर्शन की उम्मीद किसी को नहीं थी लेकिन चुनाव नतीजों से राजनेता और विश्लेषक चकित हैं. दस साल तक विद्रोही गतिविधियाँ चलाते रहे माओवादी पहली बार चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए देश के राजनीतिक दलों ने एक शांति समझौता किया था. शहरों में समर्थन ऐसा नहीं है कि माओवादियों को सिर्फ़ सुदूर इलाक़ों में ही वोट मिले हैं. राजधानी काठमांडू की 15 सीटों में भी सात सीटें इनके ख़ाते में गई हैं जिससे लगता है कि उन्हें शहरी मतदाताओं का भी ख़ासा समर्थन मिला है.
उनके पीछे चल रही है प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला की नेपाली कांग्रेस जो अभी तक 28 सीटें ही जीत सकी है. यूएमल को 23 सीटें मिली हैं. इनके अलावा मधेसी पीपुल्स राइट फ़ोरम को 14, तराई मधेस डेमोक्रेटिक पार्टी को चार, नेपाल वर्कर्स एंड पीजेंट्स पार्टी को दो, जनमोर्चा नेपाल और सद्भावना पार्टी को एक-एक सीटों पर कामयाबी मिली है. माओवादी प्रमुख प्रचंड समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता चुनाव जीत गए हैं. कई नेताओं को बड़े अंतर से जीत मिली है. इसके उलट नेपाली कांग्रेस और यूएमएल के कई बड़े नेता चुनाव हार गए हैं. प्रधानमंत्री कोइराला की बेटी और भतीजा भी हारने वालों में शामिल हैं. यूएमएल के महासचिव माधव कुमार नेपाल और वरिष्ठ नेता प्रदीप कुमार भी हार गए हैं. इस बीच माओवादियों ने कहा है कि वे दूसरे दलों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे. माओवादियों ने यह भी कहा है कि वे अपने पड़ोसी भारत और चीन के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं. कोइराला से मिले प्रचंड माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहाल उर्फ़ प्रचंड ने रविवार को प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला से मुलाक़ात की. प्रधानमंत्री के नज़दीकी सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं ने चुनाव के बाद की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की और एक-दूसरे को नए साल की बधाई दी.
कोइराला ने प्रचंड को उनकी और उनकी पार्टी को मिल रही जीत पर बधाई दी तो प्रचंड ने स्वच्छ और निष्पक्ष मतदान कराने के लिए कोइराला का आभार जताया. प्रचंड ने माओवादियों की सरकार बनने पर कोइराला से सहयोग की अपील की है. वे सात दलों के गठबंधन को बनाए रखने और उसके साथ काम करने की भी बातें कर रहे हैं. प्रचंड ने कहा, "हम शांति समझौते, बहुदलीय लोकतंत्र और देश के पुनर्निर्माण को लेकर प्रतिबद्ध हैं." इस बीच यूएमएल ने संकेत दिया है कि वह सरकार से निकल जाएगी. उसके नेता केपी ओली ने कहा, "सरकार में बने रहना जनादेश के ख़िलाफ़ होगा." भारत से रिश्ते माओवादी प्रमुख प्रचंड ने कहा है कि उनकी सरकार भारत के साथ "नए रिश्ते" बनाएगी.
भारत के एक समाचार चैनल से बातचीत में प्रचंड ने कहा, "भारत के साथ हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं. मुझे उम्मीद है कि इसके आधार पर हम भारतीय नेतृत्व के साथ एक नया संबंध विकसित करेंगे." प्रचंड का कहना है कि उनकी सरकार भारत और चीन से समान दूरी बनाकर रखेगी. अमरीकी नज़र में माओवादियों के अब भी चरमपंथी होने के सवाल पर प्रचंड ने कहा कि उन्होंने इस सवाल को पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर के सामने उठाया है. कार्टर नेपाल के चुनावों की निगरानी के सिलसिले में काठमांडू में ही हैं. इस बीच भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने नेपाल में सविधान सभा के चुनाव नतीजों का स्वागत किया है और इसे नेपाल के लोगों की जीत बताया. मुखर्जी ने भरोसा जताया है कि इन चुनावों से नेपाल लोकतंत्र की ओर बढ़ेगा. |
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