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हाईकोर्ट ने मायावती की परियोजनाएँ रोकीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीआर अंबेडकर और उनकी पत्नी की स्मृति में स्मारक बनाए जाने की मायावती की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर उत्तरप्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. अदालती आदेशों के उल्लंघन पर भी हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणियाँ की हैं. मुख्यमंत्री मायावती की इन परियोजनाओं को लेकर ख़ासा विवाद भी रहा है. एक तो ये स्मारक राजधानी लखनऊ की बेशक़ीमती ज़मीन पर बनाए जा रहे हैं और इसके लिए सरकार ने अदालती रोक के बावजूद ज़मीनों के उपयोग बदलने के आदेश जारी कर दिए हैं. दूसरे इस पर सात सौ करोड़ रुपयों की विशाल राशि ख़र्च होनी थी जिसे लेकर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी कि एक ग़रीब राज्य में जनता के पैसे का ऐसा दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि मुख्यमंत्री मायावती इन परियोजनाओं को उचित ठहराती हैं. आपत्तियाँ अदालत ने मुख्य रुप से तीन परियोजनाओं को लेकर आपत्ति की है. इन तीनों परियोजनाओं के लिए ऐसी ज़मीन का उपयोग किया जाना है जिसे या तो ग्रीन-बेल्ट के रुप में आरक्षित किया गया था या फिर वहाँ सार्वजनिक बाग़ होना था. हाईकोर्ट ने वर्ष 2006 में और फिर मायावती सरकार आने के बाद 2007 में इन ज़मीनों के उपयोग के परिवर्तन पर रोक लगाई थी. लेकिन अदालती रोक के बावजूद सरकार ने भू-उपयोग की श्रेणी को बदल दिया. अदालत ने शुक्रवार को दिए गए अपने फ़ैसले में कहा है, "यह खेद का विषय है कि भू-उपयोग न बदलने के अदालत के अंतरिम आदेश के बावजूद सरकार ने भू-उपयोग बदलने की अधिसूचना जारी कर दी." हाईकोर्ट ने कहा है कि इस मामले पर अंतिम फ़ैसला करते हुए आदेशों की अवहेलना के मामले पर भी समुचित फ़ैसला लिया जाएगा. अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 10 अप्रैल को तय की है और इस दिन राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को भू-उपयोग संबंधी सभी दस्तावेज़ लेकर उपस्थित होने को कहा है. महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ बीआर अंबेडकर और उनकी पत्नी रमा बाई को दलित वर्ग के लिए गौरव के प्रतीक के रुप में स्थापित करने के लिए मायावती ने दो महत्वाकांक्षी परियोजना बनाई थीं.
इसके तहत अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल बनाया जाना था और रमाबाई रैली स्थल का निर्माण होना था. मुख्यमंत्री ख़ुद दलित वर्ग से आती हैं और उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी भी दलितों की राजनीति करते हुए सत्ता तक पहुँची है. विपक्षी दल इन परियोजनाओं को जनता के पैसे का दुरुपयोग करके राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिशों की तरह देखते हैं. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. अपने पहले कार्यकाल में भी मायावती ने ऐसे भव्य स्मारकों का निर्माण किया था और अब वहाँ बड़ी संख्या में दलित एकत्रित होते हैं. अकेले अपने दम पर सरकार बनाने के बाद मायावती ने कई ऐसी परियोजनाओं की योजनाएँ बनाई हैं जिनको लेकर विवाद खड़ा हुआ है. इससे पहले लखनऊ के स्टेडियम को भी स्मारक में तब्दील करने की उनकी कोशिशों पर भी अदालत ने रोक लगा दी थी. |
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