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ताज कॉरिडोर मामले में याचिका ख़ारिज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ताज कॉरिडोर मामले में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट के एक खंडपीठ ने बुधवार को अपने फ़ैसले में कहा है वह मायावती पर मुक़दमा न चलाए जाने के राज्यपाल के फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका पर विचार नहीं कर सकता क्योंकि यह उसके दायरे के बाहर है. ग़ौरतरलब है कि मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्यपाल टी राजेश्वर ने ताज कॉरिडोर के मामले में मायावती और उनके मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. इसके ख़िलाफ़ एक वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उनका तर्क था कि राज्यपाल राजेश्वर राव का फ़ैसला अनुमानों पर आधारित है. अगस्त 2007 में राज्यपाल के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका दायर की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल से कहा था कि वे यह मामला न्यायालय की सहायता के लिए नियुक्त वकील (एमीकस क्यूरी) के ज़रिए लेकर आएँ. बुधवार को ताज कॉरिडोर मामले की सुनवाई कर रहे एसबी सिन्हा की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ के सामने एमीकस क्यूरी किशन महाजन ने यह मामला उठाया. इस पर पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह खंडपीठ इस मामले में कोई दखल नहीं दे सकता क्योंकि उसका दायरा पर्यावरण से संबंधित मामलों की सुनवाई करने तक है और ताज कॉरिडोर मामला आपराधिक प्रक्रिया का मामला है. जब पीठ के सामने यह सवाल उठाया गया कि सुप्रीम कोर्ट के ही निर्देश पर सीबीआई ने मायावती के ख़िलाफ़ जाँच की थी तो पीठ ने कहा कि जहाँ तक कोर्ट का अधिकार था वहाँ तक उसने कार्रवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि इसके ख़िलाफ़ किसी को शिकायत है तो उसे समुचित कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए. मायावती पिछली बार जब सत्ता में आईं थीं तब ताजमहल के पास एक व्यावसायिक परिसर का निर्माण शुरु किया गया था जिसपर पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी. 'ताज हेरिटेज कॉरिडोर' नामक इस परियोजना पर 175 करोड़ रूपए की लागत आनी थी जिसमें से 17 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए गए थे. इसके तहत ताज महल को आगरा के क़िले और इस क्षेत्र के अन्य स्मारकों से जोड़ा जाना था. साथ ही, ताजमहल के पास संरक्षित परिसर में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की भी योजना थी. जब यह परियोजना शुरु हुई तब मायावती पर आरोप लगाए गए थे कि ताज कॉरिडोर परियोजना में ग़ैर-ज़रूरी तेज़ी दिखाई गई. इस मामले के अभियुक्तों में मायावती की पूर्ववर्ती सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पर्यावरण सचिव आरके शर्मा और तीन अन्य अधिकारी शामिल हैं. मामला ताज कॉरिडोर के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ही कर रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने ही सीबीआई को निर्देश दिए थे कि वह इस मामले में मायावती की भूमिका की जाँच करे. अपनी जाँच के बाद सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टी राजेश्वर से मायावती पर मुक़दमा चलाने की अनुमति देने के लिए आवेदन किया था. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के मुताबिक़ किसी भी लोकसेवक के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने के लिए सरकार से अनुमित लेनी होती है. जब सीबीआई ने यह अनुरोध किया था तब राज्य में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और सत्ता परिवर्तन के कुछ ही दिन पहले ही उन्होंने सीबीआई के अनुरोध वाली फ़ाइल राज्यपाल के पास भेज दी थी. पाँच जून 2007 को राज्यपाल राव ने मुख्यमंत्री मायावती और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें राज्यपाल के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आवेदन05 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस मायावती पर मुक़दमे की अनुमति नहीं05 जून, 2007 | भारत और पड़ोस ताज कॉरिडोर मामले की सुनवाई स्थगित15 मई, 2007 | भारत और पड़ोस ताजपोशी से पहले 'ताज का मामला'11 मई, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में होगी 'ठेके पर खेती'03 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस मायावती को 'नहीं मिली' चिट्ठी20 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस लखनऊ में स्टेडियम गिराने पर रोक10 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'मिश्रा सवर्णों को एकजुट करेंगे'27 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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