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मंगलवार, 15 मई, 2007 को 11:57 GMT तक के समाचार
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ताज कॉरिडोर मामले की सुनवाई स्थगित

मायावती
ताज कॉरिडोर परियोजना पर पर्यावरणविदों ने एतराज़ जताया था
केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई की विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति मिलने तक ताज कॉरिडोर मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है.

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मायावती के ख़िलाफ़ मामला चलाने की अनुशंसा राज्यपाल टीवी राजेश्वर को भेज दी थी.

इस बीच विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) बहुमत में आई और मायावती मुख्यमंत्री बन चुकी हैं.

उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने के लिए सीबीआई को राज्यपाल से अनुमति मिलने का इंतज़ार है.

मंगलवार को लखनऊ में सीबीआई अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब तक मायावती के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति नहीं मिलती है, तब तक अगली सुनवाई नहीं होगी.

इससे पहले 15 फरवरी को अदालत ने लोकसेवकों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति प्राप्त करने के लिए सीबीआई को तीन माह का समय दिया था.

पेचीदा मामला

यह मामला एक बार फिर राजनीतिक रंग ले सकता है क्योंकि केंद्र में कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार है और माना जा रहा है कि राज्यपाल टीवी राजेश्वर केंद्र की सलाह को दरकिनार नहीं कर सकते.

सुप्रीम कोर्ट ने मायावती के ख़िलाफ़ मामला बंद नहीं करने के निर्देश दिए थे

ऐसे में लगभग 175 करोड़ रुपए का ताज कॉरिडोर मामला बसपा और कांग्रेस के बीच सियासी संबंधों को नया मोड़ दे सकता है.

वर्ष 2003 में जब वाजपेयी सरकार में पर्यटन और संस्कृति मंत्री रहे जगमोहन ने ताज कॉरिडोर मामले में कड़ा रुख़ अख़्तियार किया था तब भी यह मामला राजनीतिक हो गया था और बसपा और एनडीए के रिश्तों में खटास आ गई थी.

ताज कॉरिडोर

उल्लेखनीय है कि मायावती जब पिछली बार सत्ता में आईं थीं तब ताज महल के पास एक व्यावसायिक परिसर बनाए जाने की कोशिश की गई थी जिसपर पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी.

ताज हेरिटेज कॉरिडोर नामक इस परियोजना पर 175 करोड़ रूपए की लागत आनी थी जिसमें से 17 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए गए थे.

इसके तहत ताजमहल को आगरा के किले और इस क्षेत्र के अन्य स्मारकों से जोड़ा जाना था. साथ ही, ताजमहल के पास संरक्षित परिसर में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की भी योजना थी.

जब यह परियोजना शुरु हुई तब मायावती पर आरोप लगाए गए थे कि ताज कॉरिडोर परियोजना में ग़ैर-ज़रूरी तेज़ी दिखाई गई.

इस मामले के अभियुक्तों में मायावती की पूर्ववर्ती सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पर्यावरण सचिव आरके शर्मा और तीन अन्य अधिकारी शामिल हैं.

दोबारा सत्ता संभालने के बाद मायावती ने आरके शर्मा को पंचायती राज विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात किया है.

आरके शर्मा ने भी अदालत से सुनवाई का मौका देने की अपील की है. उनके वक़ील ने दलील दी कि सीबीआई ने मुक़दमा चलाने की अनुमति माँगकर गलत किया है.

अदालत ने इस अपील पर सुनवाई के लिए 23 मई की तिथि मुक़र्रर की है.

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