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'मायावती के ख़िलाफ़ जाँच बंद न करें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से कहा कि वह ताज कॉरिडोर मामले में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ख़िलाफ़ जाँच बंद न करे. न्यायमूर्ति रुमा पॉल की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ ने सीबीआई को दो हफ़्तों का समय देते हुए कहा है कि वह इस मामले में जुटाए गए सभी सुबूत पेश करे. एटॉर्नी जनरल मिलन बैनर्जी ने राय दी है कि जो सुबूत हैं उनके आधार पर बहुजन समाज पार्टी के नेता मायावती के ख़िलाफ़ कोई मामला नहीं बनता दिखता. उल्लेखनीय है कि मायावती के मुख्यमंत्री रहते हुए ताज महल के पास एक व्यावसायिक परिसर बनाए जाने की कोशिश की गई थी जिसपर पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी. 175 करोड़ रुपयों के ताज कॉरिडोर मामले में अदालत की मदद के लिए नियुक्त वकील कृष्ण महाजन ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया था कि सीबीआई मायावती के ख़िलाफ़ जाँच बंद करने की तैयारी में है.
उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश पर यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था और सुप्रीम कोर्ट ने ही पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, उनके प्रधान सचिव पीएल पुनिया और कुछ अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. अदालत में स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश करते हुए सॉलीसिटर जनरल ग़ुलाम वाहनवती ने बताया कि ताज कॉरिडोर मामले में एकत्र साक्ष्य को लेकर अधिकारी अलग-अलग तरह की राय व्यक्त कर रहे थे इसलिए एटॉर्नी जनरल से राय माँगी गई थी. उन्होंने बताया कि गत दिसंबर में सारे साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद राय दी थी कि इस प्रकरण में मायावती के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने के लिए साक्ष्य अपर्याप्त हैं. उनका कहना था कि सीबीआई के निदेशक की राय भी ऐसी ही थी. |
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