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मंगलवार, 05 जून, 2007 को 12:09 GMT तक के समाचार
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मायावती पर मुक़दमे की अनुमति नहीं

मायावती
मायावती चौथी बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी हैं
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने टी राजेश्वर ने बहुचर्चित ताज कोरिडोर प्रकरण में मुख्यमंत्री मायावती के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है.

राजभवन के आधिकारिक सूत्रों से मालूम हुआ है कि राज्यपाल ने सुश्री मायावती और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के ख़िलाफ मुक़दमा चलाने की अनुमति नहीं दी है.

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने कुछ हफ़्ते पहले राज्यपाल को प्रार्थना पत्र देकर मुक़दमा चलाने की सिफ़ारिश करने का अनुरोध किया था.

अनुमति ज़रूरी

भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के अनुसार किसी भी लोक सेवक के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है.

तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पद छोड़ने से कुछ ही रोज़ पहले ये फ़ाइल राज्यपाल के पास भेज दी थी. इसी बीच, सत्ता परिवर्तन हो गया और मायावती मुख्यमंत्री बन गईं.

सीबीआई की ओर से लखनऊ की एक अदालत में बताया गया कि क्योंकि राज्यपाल ने इस मामले में मुक़दमा चलाने की अनुमति देने से मना कर दिया है, इसलिए इस मामले में आगे किसी कार्यवाही का औचित्य नहीं है.

सीबीआई ने अपने प्रार्थना पत्र के साथ गवर्नर टी राजेश्वर राव के तीन जून के उस आदेश की प्रतिलिपि भी दाखिल की जिसमें कहा गया है कि मायावती और नसीमुद्दीन सिद्दीकी के ख़िलाफ मुक़दमा चलाने की अनुमति नामंज़ूर की जाती है.

गवर्नर के इस निर्णय को देखते हुए अदालत ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि मुक़दमा चलाने की अनुमति के अभाव में अब अदालत इन दोनों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आगे कार्रवाई करने में असमर्थ है.

कोर्ट ने कहा कि शेष दो अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति का अभी अदालत इंतज़ार कर रही है. इनमें से एक हैं आईएएस अधिकारी आर के शर्म जो उस समय राज्य के पर्यावरण सचिव थे और एक अन्य अधिकारी राजेंद्र प्रसाद जो पर्यावरण विभाग में कार्यरत थे.

इस फ़ैसले से मुख्यमंत्री मायावती गदगद़ हैं. उन्होंने आनन फ़ानन प्रेस कांफ्रेस बुलाकर कहा कि गवर्नर के इस आदेश से साबित हो गया है कि ताज कॉरीडोर प्रकरण से उनका कोई लेना देना नहीं था और तत्कालीन बीजेपी सरकार उन पर राजनीतिक दबाव बनाने की नीयत से सीबीआई का इस्तेमाल कर रही थी.

मायावती ने यह भी कहा कि विरोधी दल बीजेपी और समाजवादी पार्टी इस मामले को राष्ट्रपति के चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री के शब्दों में यह उनकी हताशा और निराशा का प्रतीक है.

राजनीतिक महत्व

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मायावाती पिछले दिनों दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलीं थी और केंद्र सरकार के साथ सहयोग की पेशकश की थी.

राजनीतिक प्रेक्षक राज्यपाल के निर्णय को इसी रोशनी में देख रहे हैं.

इस बीच, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने राज्यपाल के निर्णय का स्वागत किया है.

इससे भी राजनीतिक प्रेक्षकों की ये धारणा और भी बलवती होती है कि राज्यपाल ने क़ानूनी कम राजनीतिक कारणों से ये फ़ैसला किया है.

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