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बुधवार, 27 जून, 2007 को 13:36 GMT तक के समाचार
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'मिश्रा सवर्णों को एकजुट करेंगे'

मायावती के साथ बैठे सतीश मिश्रा के वर्चस्व से बसपा में कुछ लोग परेशान हैं
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने घोषणा की है कि उनके सरकार के वरिष्ठ मंत्री और ब्राह्मण नेता सतीश चंद्र मिश्रा कैबिनेट से त्यागपत्र देकर दो-ढाई महीने बाद "देश के सवर्णों को एकजुट करने का अभियान" चलाएँगे.

मायावती ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद सतीश मिश्रा को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वणों को पार्टी से जोड़ने के काम में लगाया गया था इसीलिए शुरू में उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकार के हित में उन्हें मंत्री बनाया गया ताकि वो सभी जरूरी काम में दखल दे सकें. दो-ढाई महीने में यह काम पूरा हो जाएगा उसके बाद ये पूरे देश में सवर्ण समाज को बीएसपी से जोड़ने के काम में लग जाएँगे."

 सरकार के हित में उन्हें मंत्री बनाया गया ताकि वो सभी जरूरी काम में दखल दे सकें. दो-ढाई महीने में यह काम पूरा हो जाएगा उसके बाद ये पूरे देश में सवर्ण समाज को बीएसपी से जोड़ने के काम में लग जाएँगे
मायावती

मायावती ने यह भी ऐलान किया कि उनकी सरकार में एक गैर विधायक मंत्री अनंत कुमार उर्फ़ अंतु मिश्रा फ़रूर्खाबाद से विधानसभा उपचुनाव लडेंगे.

मायावती ने इन दोनों मंत्रियों को लेकर कुछ टीवी चैनल और अखबारों में छपी खबरों की कड़ी आलोचना करते हुए लंबा स्पष्टीकरण दिया कि "सतीश मिश्रा की एक बहन, भाई और उनके अन्य रिश्तेदारों को, पिछले दो-तीन सालों में पार्टी के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए सरकार में पद दिए गए हैं."

मायावती ने किसी मीडिया समूह का नाम लिए बिना कई बार परोक्ष चेतावनी दी कि कुछ चैनल और अखबार वालों ने पिछली सरकार से अनुचित लाभ लिए हैं जिनकी जाँच उनकी सरकार करा रही है.

मायावती ने मीडिया को नसीहत देने के साथ-साथ यह चेतावनी भी दी कि वह आलोचनाओं से घबराती नहीं, उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि पार्टी में जिस व्यक्ति का ज्यादा विरोध होगा उसको वह और आगे बढ़ाएँगी.

जातीय समीकरण

मायावती ने कहा कि उनकी सरकार में कैबिनेट सचिव जाट, पुलिस महानिदेशक ठाकुर और प्रमुख गृह सचिव चमार जाति से हैं. मायावती ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्री सचिवालय में चमार जाति के दो अधिकारी रखे हैं.

मायावती कुछ पत्रकारों से भी नाराज़ हैं

मायावती को ऐसा स्पष्टीकरण इसलिए देना पड़ा क्योंकि पिछले कुछ समय से चर्चा चल पड़ी थी कि राज्य में सतीश मिश्रा और उनके क़रीबी ब्राह्मण नेताओं की ही चल रही है, दलितों की नहीं.

सचिवालय में कई लोग यह शिकायत करते हुए सुने जाते हैं कि इस बार 'बहन जी' की सरकार में केवल जनेऊ वालों के काम हो रहे हैं.

पार्टी के भीतर ब्राह्मण और गैर ब्राह्मण गुटों के बीच चल रही खींचतान से मुख्यमंत्री मायावती दबाव में है, इसी कारण कई महत्वपूर्ण पदों पर अफसरों में फेरबदल भी किए गए लेकिन इससे बात बनती नहीं दिखी.

ऐसा लगता है कि मायावती ने मीडिया की ख़बरों के बहाने से अपनी पार्टी के उन नेताओं को भी चेतावनी दी है जो सरकार में सतीश मिश्रा के वर्चस्व को लेकर परेशान रहते हैं.

मायावती ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुराने वफादार मंत्रियों नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी, बाबू सिंह कुशवाहा, स्वामी प्रसाद मौर्य और इंद्रजीत सरोज को विशेष रूप से बैठा रखा था जबकि आम तौर पर वह अकेले ही संवाददाता सम्मेलन करती हैं.

संपत्ति

मायावती ने अपनी संपत्ति को लेकर अखबारों में छपी खबरों के बारे में भी सफाई दी.

ब्राह्णण
मायावती देश भर के ब्राह्मणों का समर्थन चाहती हैं

विधान परिषद उपचुनावों में नामांकन के दौरान अपने शपथपत्र में मायावती ने स्पष्ट किया था कि उनके पास चल और अचल संपत्ति मिलाकर 52 करोड़ रूपए से अधिक की जायदाद है.

इनमें दिल्ली और लखनऊ के बंगले, व्यावसायिक बिल्डिंग और सोना, चांदी, जवाहरात आदि शामिल है.

अखबारों में कहा गया है कि सन 2004 में लोकसभा चुनाव लड़ते समय मायावती के पास इतनी जायदाद नहीं थी.

मायावती ने अपनी सफाई में कहा कि 2003 में मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद जब ताज कोरिडोर के मामले में सीबीआई ने उनके ठिकानों पर छापे मारे तो पूरे देश से पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनको उपहार स्वरूप धनराशि भेंट की और कहा कि यह पार्टी खर्च के लिए नहीं बल्कि उनकी निजी ज़रूरतों के लिए है.

मायावती का कहना है कि बंगले आदि कार्यकर्ताओं की ओर से मिली धनराशि से ख़रीदे गए हैं.

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