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रविवार, 30 मार्च, 2008 को 11:49 GMT तक के समाचार
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कांग्रेस ने मायावती को जमकर लताड़ा

कांग्रेस अधिवेशन
अधिवेशन के साथ ही कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल भी बज चुका है
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की नेता सुश्री मायावती पर ज़बरदस्त हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार पिछले दस महीनों में पूरी तरह असफल रही है. अपराध बढ़े हैं और प्रशासन में चारो तरफ़ भ्रष्टाचार का बोलबाला है.

ये बातें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कानपुर शहर में चल रहे अधिवेशन के राजनीतिक प्रस्ताव में कही गई हैं.

प्रस्ताव

राजनीतिक प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी(बसपा) का प्रस्ताव, उत्तर प्रदेश का बंटवारा करके छोटे राज्यों के गठन के मुद्दे पर संविध संबद्ध प्रक्रिया का पालन करने के बजाय केवल राजनीति कर रही है.

प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर बसपा सरकार इस संबंध में गंभीर है तो उसे विधानसभा से औपचारिक प्रस्ताव पास कराकर केंद्र सरकार को भेजना चाहिए.

 यहां दो पार्टियां साम्प्रदायिक और जातीय आधार पर कांग्रेस को चुनौती दे रही हैं लेकिन अब हम लोग कांग्रस की विचारधारा के आधार पर पार्टी को फिर से मज़बूत करेंगे
रीता बहुगुणा जोशी, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष

प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि नए राज्यों के गठन के लिए एक आयोग का गठन किया जाए.

प्रस्ताव में महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़ों द्वार उत्तर भारतीयों पर हमले पर चिंता जताते हुए महाराष्ट्र सरकार से मांग की गई है कि उत्तर भारतीय परिवारों को सुरक्षा प्रदान करें और इनके विरुद्ध हिंसा भड़काने वाले नेताओं के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाए.

इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि इस सम्मेलन का लक्ष्य पार्टी को बदहाली से उबारना है.

श्रीमती जोशी ने बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना कहा, “यहां दो पार्टियां साम्प्रदायिक और जातीय आधार पर कांग्रेस को चुनौती दे रही हैं लेकिन अब हम लोग कांग्रस की विचारधारा के आधार पर पार्टी को फिर से मज़बूत करेंगे.”

कांग्रेस
फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में कांग्रस अपनी खोई ज़मीन तलाश रही है

लेकिन श्रीमती जोशी ने इस बात पर चिंता जताई कि राज्य सरकार के ख़िलाफ़ संघर्ष में कार्यकर्ता बढ़ चढ़ कर भागेदारी कर रहे हैं लेकिन नेता उतने सक्रिय नहीं हैं.

कांग्रेस संगठन में उत्तर प्रदेश के प्रभारी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण में उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो अपने क्षेत्र में पार्टी का काम करने के बजाय दिल्ली और लखनऊ में नेताओं के इर्द-गिर्द चक्कर लगाते हैं.

26 साल बाद

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी 26 साल बाद अपनी आम सभा का यह अधिवेशन कानपुर में कर रही है इससे पहले 1982 में कांग्रेस पार्टी का अधिवेशन कानपुर के इसी नानाराव पार्क में हुआ था जब इंदिरा गांधी सत्ता में थीं और राजीव गांधी नए-नए महासचिव बने थे.

 जब गाड़ी पटरी से उतर जाती है तो उसे पटरी पर वापस लाने के लिए भगीरथ प्रयास करने होते हैं और इस अधिवेशन से राहुल गांधी और सोनिया गांधी वही भगीरथ प्रयास कर रही हैं
श्रीप्रकाश जायसवाल, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री

अब, 26 साल बाद फिर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब सोनिया गांधी दिल्ली में सत्तारूढ़ गठबंधन की अध्यक्ष हैं और राहुल गांधी नए-नए महासचिव बने हैं.

राहुल गांधी ने पिछले दिनों कांग्रेस संगठन में आंतरिक लोकतंत्र की बहाली और जनता से सीधे संवाद की ज़रूरत बताई थी. यह सम्मेलन उसी दिशा में एक प्रयास बताया जा रहा है.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, “जब गाड़ी पटरी से उतर जाती है तो उसे पटरी पर वापस लाने के लिए भगीरथ प्रयास करने होते हैं और इस अधिवेशन से राहुल गांधी और सोनिया गांधी वही भगीरथ प्रयास कर रही हैं.”

कार्यकर्ताओं की टीस

बड़े नेताओं के बाद जब कार्यकर्ताओं के बोलने की बारी आई तो इलाहाबाद से आए राजेंद्र त्रिपाठी व कई अन्य वक्ताओं ने नेताओं को इस बात के लिए आड़े हाथों लिया कि ज़मीनी नेताओं को महत्व नहीं दिया जा रहा है.

प्रदेश में अब पार्टी की उम्मीद अपने नए महासचिव पर ही टिकी हैं

अन्य वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि पार्टी को टिकट बांटते समय दलितों और पिछड़ों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए तभी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस खड़ी की जा सकती है.

उत्तर प्रदेश से लोकसभा की 80 सीटें हैं लेकिन पिछले चुनाव में कांग्रेस केवल 10 सीटें जीत सकी और पिछले विधानसभा चुनाव में केवल 19 सीटें और 7 फ़ीसदी वोट ही मिले. यही कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता है और इसलिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क साध रहे हैं.

अधिवेशन के पहले दिन राहुल के न आ पाने से कार्यकर्ताओं में कुछ निराशा दिखी. मां-बेटे अब दोनों कल अधिवेशन के समापन सत्र को संबोधित करेंगे और उसके बाद कानपुर के फूलबाग में आम सभा को भी संबेधित करेंगे.

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