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पीड़ित दलित परिवार से मिले राहुल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने शनिवार को इटावा ज़िले के अमीनाबाद गाँव जाकर उस दलित परिवार से मुलाक़ात की है जिसके पाँच सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. इस परिवार में चार अबोध बच्चियाँ ही बची हैं. राहुल गांधी ने इन बच्चियों के लिए ढाई लाख रुपए की रकम बैंक में जमा करवाने की घोषणा की है. ख़बरें हैं कि इन दलितों की हत्या ज़मीन के विवाद के कारण हुई थी लेकिन अब यह राजनीतिक मामला बन गया है. बुधवार को हुई हत्या पर प्रशासन की नज़र वैसी नहीं थी जैसी कि राहुल गांधी के वहाँ जाने की घोषणा के बाद हो गई. इसके बाद आनन-फ़ानन में मुख्यमंत्री मायावती ने भी अमीनाबाद जाने का फ़ैसला किया और शुक्रवार की शाम वहाँ जा पहुँचीं. मुख्यमंत्री मायावती वाराणसी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगवानी के बाद आला अधिकारियों के साथ सीधे इटावा पहुँचीं. उन्होंने पीड़ित परिवारों के लोगों से मुलाक़ात की और सहायता का ऐलान किया. मायावती ने घोषणा की कि हत्याकांड से अनाथ हुई चारों बच्चियों की परवरिश और शादी तक का इंतज़ाम प्रदेश सरकार करेगी. मुख्यमंत्री ने माना कि सरकारी अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की होती तो हत्याकांड टाला जा सकता था. उन्होंने लापरवाही के आरोप में वहाँ के थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया. राहुल का दौरा
राहुल गांधी ने इस परिवार की बच्चियों से 40 मिनट अकेले में बात की और उनकी दिक़्कतों के बारे में पूछताछ की. उन्होंने एक बच्ची को गोद में उठा लिया और उससे बात करते रहे. कांग्रेस महासचिव ने इन बच्चियों के लिए बैंक में ढाई लाख रुपए का फ़िक्स्ड डिपॉज़िट करवाने की घोषणा की है. इससे पहले वहाँ जाते हुए रास्ते में राहुल गांधी एक किसान से मिलने के लिए रुके और किसान के साथ रोटियाँ भी खाईं. हालांकि राहुल गांधी ने पत्रकारों से बात नहीं की लेकिन प्रेक्षकों का कहना है कि यह संदेश वे दे ही गए कि कांग्रेस के ख़िलाफ़ दलित विरोधी होने की शिकायतों को वे दूर करने में जुट गए हैं. समाजवादी पार्टी भी ऐसा नहीं है कि राजनीति सिर्फ़ कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच चल रही है. इटावा समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह का गृह जनपद है लेकिन उनकी पार्टी का भी कोई नेता सांत्वना देने नहीं पहुँचा था. लेकिन राहुल का दौरा घोषित होते ही सपा महासचिव रामगोपाल यादव तत्काल मायावती के बाद वहाँ पहुँच गए. दरअसल मायावती पिछले कुछ महीनों में रैलियाँ और सभाएँ करके कांग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाती रही हैं. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की पिछले विधानसभा चुनावों में ख़राब स्थिति की वजह दलित वोट बैंक का मायावती के साथ जाना माना जाता है. |
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