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गुजरात दंगों की जाँच के लिए विशेष दल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि वो वर्ष 2002 के सांप्रदायिक दंगों की नए सिरे से जाँच के लिए दस दिन में विशेष जाँच दल गठित करने की अधिसूचना जारी करे. अरजित पसायत की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने इसके लिए पाँच सदस्यीय विशेष जाँच दल गठित करने का निर्देश दिया है. इसका नेतृत्व सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन करेंगे. इस जाँच दल में पूर्व पुलिस महानिदेशक सीबी सत्पथी के अलावा गुजरात के तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गीता जौहरी, शिवानंद झा और आशीष भाटिया को शामिल किया है. अदालत ने कहा है कि ये दल तीन महीने में जाँच पूरी कर अपनी रिपोर्ट उसे सौंपेगा. इसके बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में इस मामले पर विचार किया जाएगा. व्यापक हिंसा इस जाँच में सांप्रदायिक हिंसा के 10 प्रमुख मामले शामिल हैं जिनमें ब्रितानी नागरिक इमरान मोहम्मद सलीम दाऊद के परिवारजनों की हत्या का भी मामला भी है.
इसके अलावा सरदारपुरा, नरोदापाटिया, गुलबर्ग सोसाइटी और आनंद के ओट इलाक़े में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बड़े मामलों की भी जाँच की जाएगी. दरअसल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जाँच के दौरान कथित रूप से प्रत्यक्षदर्शियों को डराने-धमकाने और कई गवाहों के मुकर जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की थी. सिटीजंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस की तीस्ता सीतलवाड़ ने बीबीसी को बताया, "हमने और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माँग की थी कि गुजरात की राजनीतिक व्यवस्था को देखते हुए वहाँ स्वतंत्र जाँच मुमकिन नहीं है. वहाँ पर पुलिस काफ़ी दबाव में काम कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से उम्मीद है कि लोगों को इंसाफ़ मिलेगा." उल्लेखनीय है कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग में 59 हिंदुओं के मारे जाने के बाद दंगे भड़क उठे थे. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों के दौरान एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर मुसलमान थे. हालाँकि कई स्वतंत्र एजेंसियाँ मरने वालों की संख्या दो हज़ार तक बताती हैं. |
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