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मंगलवार, 25 मार्च, 2008 को 11:49 GMT तक के समाचार
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गुजरात दंगों की नए सिरे से जाँच होगी
सुप्रीम कोर्ट
गुजरात दंगों की तफ़्तीश सियासत और आयोगों में उलझी हुई है
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 में गुजरात मे हुए सांप्रदायिक दंगों की फिर से जाँच करने के लिए पाँच सदस्यीय विशेष जाँच दल के गठन का सुझाव स्वीकार कर लिया है.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेष जाँच दल अपनी रिपोर्ट तीन महीनों के अंदर सौंप देगा.

इस पाँच सदस्यीय दल में गुजरात के तीन उच्च पुलिस अधिकारियों सहित केंद्रीय जाँच आयोग (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आरके राघवन और पूर्व पुलिस महानिदेशक सीबी सत्पथी भी होंगे.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दंगों से संबंधित मामलों की सुनवाई गुजरात से बाहर करवाने और दंगों की जाँच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से फिर से करवाने की माँग की थी.

लेकिन गुजरात दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के एमिकस क्युरे हरीश साल्वे ने बताया कि मामले को सीबीआई को सौंपने के सवाल पर मोदी सरकार ने पहले ही चुनौती दे रखी है इसलिए विशेष जाँच दल का गठन बेहतर विकल्प होगा.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जाँच के दौरान कथित रूप से प्रत्यक्षदर्शियों को डराने-धमकाने और कई गवाहों के मुकर जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की थी.

 हमने और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माँग की थी कि गुजरात की राजनीतिक व्यवस्था के अंदर स्वतंत्र तहक़ीक़ात मुमकिन नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से उम्मीद है कि लोगों को इंसाफ़ मिलेगा
तीस्ता सीतलवाड़, सामाजिक कार्यकर्ता

सिटीजंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस की तीस्ता सीतलवाड़ ने बीबीसी को बताया, "हमने और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने माँग की थी कि गुजरात की राजनीतिक व्यवस्था को देखते हुए वहाँ स्वतंत्र जाँच मुमकिन नहीं है. वहाँ पर पुलिस काफ़ी दबाव में काम कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से उम्मीद है कि लोगों को इंसाफ़ मिलेगा."

27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में कथित तौर पर आग लगाए जाने से 59 हिंदू तीर्थयात्रियों के मारे जाने के बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी.

जिन दस मामलों की जाँच की जाएगी उसमें नरोदा पाटिया, बेस्ट बेकरी, गुलबर्ग सोसाइटी जैसे बड़े कांड शामिल हैं.

इन सभी मामलों की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस की याचिकाएँ मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाल दी थी.

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