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मंगलवार, 27 दिसंबर, 2005 को 13:35 GMT तक के समाचार
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गुजरात में क़ब्रगाह मिली

गुजरात दंगों के प्रभावित
गुजरात दंगे कई महीने तक चले थे
भारत के गुजरात राज्य में पुलिस ने बताया है कि पंचमहल ज़िले में कुछ ग्रामीणों को एक क़ब्रगाह से कुछ मानव अवशेष मिले हैं.

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि ये मानव अवशेष उन मुसमलानों के हैं जिन्हें मार्च 2002 में सांप्रदायिक दंगों के दौरान एक भीड़ ने मार दिया था.

गुजरात के पुलिस महानिदेशक एके भार्गव ने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहने से पहले यह पुष्टि किए जाने की ज़रूरत है कि ये मानव अवशेष सांप्रदायिक दंगों के प्रभावित लोगों के हैं या यह कोई पुरानी क़ब्रगाह है जिसका अब पता चला है.

यह अभी पता नहीं चला है कि इस क़ब्रगाह में कितने मानव अवशेष मिले हैं.

भार्गव ने कहा कि इस बारे में कोई ठोस नतीजा सामने आने से पहले इस मुद्दे को सनसनीख़ेज़ करके पेश नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए हैं और मामले की जाँच पड़ताल कर रहे हैं.

पंचमहल ज़िले के पंडारवड़ा गाँव में मार्च 2002 में एक भीड़ ने 26 मुसलमानों की हत्या कर दी थी.

अभियुक्त बरी

एक सामाजिक कार्यकर्ता सुहेल टोपीवाला ने बीबीसी से कहा कि उस हमले में 26 लोग मारे गए थे जिनमें से 21 का पोस्टमार्टम किया गया था और पाँच लापता दर्ज किए गए थे.

सुहेल टोपीवाला ने दावा किया कि पुलिस ने सिर्फ़ आठ लोगों की मौत का मामला दर्ज किया था और कोई भी शव परिजनों या रिश्तेदारों को नहीं सौंपा गया था.

गुजरात दंगे

टोपीवाला ने कहा कि मारे गए लोगों के संबंधी उनके शवों का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें पता चला कि पनवन नदी के किनारे कोई सामूहिक क़ब्रगाह है.

उन्होंने कहा कि लोगों ने उस क़ब्रगाह को खोदना शुरू किया तब उन्हें ये मानव अवशेष मिले.

एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा कि पंडारवड़ा में हुई मौतों के सिलसिले में एक मुक़दमा चला था जिसमें 2002 में सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था.

तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा कि उनके संगठन सिटिज़ंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस ने इस मुक़दमे को फिर से शुरू किए जाने की एक अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी.

उन्होंने मांग की कि इस क़ब्रगाह से मिले मानव अवशेषों की फ़ोरेंसिक जाँच कराई जानी चाहिए और उनका संगठन इस मामले में राज्य के हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगा.

ग़ौरतलब है कि फ़रवरी 2002 में गोधरा में एक रेलगाड़ी में आगज़नी की घटना के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए थे जो कई महीने चले थे.

गोधरा में रेलगाड़ी में आगज़नी की घटना में 59 हिंदुओं की मौत हो गई थी और बाद में चले सांप्रदायिक दंगों में आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.

अलबत्ता ग़ैरसरकारी संगठन मारे गए लोगों की संख्या दो हज़ार से ज़्यादा बताते हैं.

दंगों से निपटने के तरीके को लेकर राज्य की नरेंद्र मोदी सरकारी की आलोचना हुई है और साथ ही ऐसे भी आरोप लगे हैं कि राज्य सरकार दंगों के प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने में नाकाम रही है.

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