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गुजरात पुस्तकों में 'हिटलर की तारीफ़' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के गुजरात राज्य में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्कूल की कुछ ऐसी पाठ्य पुस्तकों की आलोचना की है जिनमें जर्मनी के पूर्व तानाशाह हिटलर की प्रशंसा की गई है. राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने ये पुस्तकें तैयार की हैं जिनमें एक अध्याय है - नाज़ीवाद की अंदरूनी उपलब्धियाँ. समाचार एजेंसी एएफ़पी ने इस अध्याय के कुछ अंशों का हवाला देते हुए कहा है, "हिटलर ने जर्मन सरकार के लिए बहुत छोटे से समय में ही प्रतिष्ठा और सम्मान अर्जित किया और एक मज़बूत प्रशासनिक ढाँचा खड़ा किया." एक समाजसेवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता सैड्रिक प्रकाश का कहना है कि इन पुस्तकों में 300 से ज़्यादा ग़लतियाँ हैं और उनमें नाज़ीवाद के दौरान हुई हत्याओं का बहुत कम ज़िक्र है. उनका दावा है कि इन पुस्तकों में एक बार भी महात्मा गाँधी की तस्वीर नहीं छापी गई है जबकि अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें छापी गई हैं. गुजरात सरकार ने इन दावों को बेबुनियाद कहते हुए ख़ारिज कर दिया है. राज्य के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि जब गुजराती की पुस्तकों का अनुवाद अंग्रेज़ी में हुआ तो कुछ अनियमितताएँ हो गईं और उनका ज़िक्र संदर्भ से हटकर किया गया. ये पुस्तकें 13 से 15 साल के बच्चों को पढ़ाई जाती हैं और इन्हें स्कूलों में 2004 में शुरू किया गया था. 2005 के लिए इन्हें फिर से प्रकाशित किया गया है. मानवाधिकार कार्यकर्ता सेड्रिक प्रकाश ने माँग की है कि इन पुस्तकों को एक सप्ताह के भीतर स्कूल पाठ्यक्रम से हटाए जाने की माँग की है अन्यथा वे अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे. सेड्रिक प्रकाश कहते हैं कि ये पुस्तकें भारतीय संविधान का उल्लंघन करती हैं. |
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