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शुक्रवार, 13 मई, 2005 को 05:56 GMT तक के समाचार
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भंडारी ने भी मोदी पर सवाल उठाए
गुजरात में सांप्रदायिक दंगे
कई महीने तक चले दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे
भाजपा के वरिष्ठ नेता और गुजरात के पूर्व राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी ने गुजरात के दंगों को लेकर वहाँ के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है.

बीबीसी से बातचीत में सुंदर सिंह भंडारी ने कहा कि गुजरात दंगों के दौरान सरकारी मशीनरी को थोड़ी जल्दी कार्रवाई करनी चाहिए थी.

उनका कहना था कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को यह स्वीकार करना चाहिए कि आकलन में थोड़ी देर हुई.

भंडारी का कहना था कि लगता है कि वो ऊहापोह में रहे कि अहमदाबाद में दो ही घटनाएँ हुईं हैं और दंगे थम जाएंगे. लेकिन दंगे लंबे चल गए.

विशेष बातचीत में गुजरात के पूर्व राज्यपाल ने कहा कि इस घटनाक्रम में प्रशासन की क्या भूमिका रही, इसकी जाँच की जानी चाहिए.

इसके पहले एक हिंदी पत्रिका को दिए इंटरव्यू में सुंदर सिंह भंडारी ने कहा था कि गुजरात में दंगों पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने देरी से क़दम उठाए.

उन्होंने कहा कि यदि समय पर कार्रवाई की गई होती तो दंगों पर काबू पा लिया गया होता.

भंडारी का कहना था कि इससे पार्टी पर बदनुमा दाग लग गया. इसकी भरपाई के लिए मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाना भी एक रास्ता था.

गाँधी और गोधरा

भाजपा नेता का कहना था कि जिस तरह गाँधीजी की हत्या का मामला 50 साल तक चलता रहा, वैसे ही लोग गोधरा का नाम लेते रहेंगे.

 जिस तरह गाँधीजी की हत्या का मामला 50 साल तक चलता रहा, वैसे ही लोग गोधरा का नाम लेते रहेंगे
सुंदर सिंह भंडारी, गुजरात के पूर्व राज्यपाल

उस समय अगर स्थिति संभाल ली होती तो यह नौबत ही न आती.

इसके पहले पार्टी के एक अन्य नेता प्रमोद महाजन ने भी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था.

उनका कहना था कि गुजरात के दंगों के कारण पार्टी को भारी नुक़सान उठाना पड़ा है.

यहाँ तक भाजपा के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने भी नरेंद्र मोदी पर उंगली उठाई थी.

गुजरात की गुप्तचर सेवा के पूर्व प्रमुख आरबी श्रीकुमार ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने दंगों के दौरान मुसलमानों को निशाना बनाया था.

ग़ौरतलब है कि गुजरात में फ़रवरी, 2002 में शुरू हुए सांप्रदायिक दंगे कई महीने तक चले थे जिनमें एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे, उनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.

मानवाधिकार संगठन मृतकों की संख्या क़रीब दो हज़ार बताते हैं.

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