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मंगलवार, 16 नवंबर, 2004 को 11:07 GMT तक के समाचार
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बेस्ट बेकरी गवाह ने 11 की शिनाख़्त की
बेस्ट बेकरी
बेस्ट बेकरी में 14 लोग ज़िंदा जला दिए गए थे
गुजरात में 2002 में सांप्रदायिक दंगों के दौरान एक मार्च को हुए बेस्ट बेकरी आगज़नी काँड की एक गवाह यासमीन शेख़ ने 11 अभियुक्तों की शिनाख़्त कर ली है.

यासमीन शेख़ ने मुंबई की एक अदालत में मंगलवार को इन 11 अभियुक्तों को पहचाना.

यासमीन शेख़ बेस्ट बेकरी काँड की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ की भाभी यानी भाई की बीवी है.

यासमीन ने मंगलवार को अदालत में जज के आदेश पर अभियुक्तों को एक-एक करके देखा और 11 की शिनाख़्त कर ली.

यासमीन ने अदालत को बताया कि वे अभियुक्त उस भीड़ में शामिल थे जिसने वड़ोदा में बेस्ट बेकरी पर एक मार्च 2002 को हमला किया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ यासमीन शेख़ ने इन अभियुक्तों की पहचान नाम लेकर की और उनमें से दस के नाम भी लिए, जो इस तरह थे - संजय रतिलाल ठक्कर, पंकज गोसाई, जगदीप चुन्नीलाल राजभर, समाभाई बरिया, शैलेंद्र टाडवी, रवि राजाराम चौहान, राजूभाई बरिया, दिनेश राजभर, यासिम और हरीश देसाई बताए.

यासमीन शेख़ ने अदालत को बताया कि चार अन्य अभियुक्त भी थे जिन्होंने उनके परिवार पर हमला किया था लेकिन वे अदालत में उन अभियुक्तों के बीच मौजूद नहीं थे.

यासमीन ने उन चार लोगों के नाम जयंती चायवाला, मफत, मुन्ना और रिंकू बताए गए.

बेस्ट बेकरी मामले में कुल 21 अभियुक्त नामज़द हैं.

एक मार्च 2002 की घटना को याद करते हुए यासमीन ने कहा कि लाठियों और तलवारों से लैस भीड़ ने किस तरह बेस्ट बेकरी को निशाना बनाया था.

ज़ाहिरा शेख़
ज़ाहिरा ने हाल में फिर बयान बदल दिया था

यासमीन ने कहा कि वह ख़ुद और उनके परिवार के अन्य सदस्य बेस्ट बेकरी की इमारत के पास ही अपने घर में थे और भीड़ ने हमारे घर का दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया था.

यासमीन ने बताया कि बाद में भीड़ ने सबको बाहर आने के लिए कहा था और जब सब लोग बाहर आ गए तो उनके पति नतीफ़ुल्ला और तीन अन्य लोगों - राजू, पौफ़ेल और रियाज़ को बहुत पीटा.

यासमीन ने बताया कि उन्हें एक कमरे में ले जाया गया और उनकी इज़्ज़त लूटने की धमकी दी गई थी.

मुक़दमा

बेस्ट बेकरी मुक़दमे की सुनवाई गुजरात की अदालत में हुई थी जहाँ जून 2003 में अदालत में ही लगभग सभी गवाहों के बयान बदल देने के बाद सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था.

इस मामले की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ और कुछ अन्य गवाहों ने बाद में आरोप लगाए थे कि उन्हें डराया धमकाया गया इसलिए उन्होंने अदालत में अपने बयान बदल दिए थे.

फिर कुछ मानवाधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी बेस्ट बेकरी मामले की जाँच फिर से हो और मुक़दमा महाराष्ट्र के बाहर कहीं चलाया जाए.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह मुक़दमा मुंबई की एक अदालत में शुरू किया गया और अभी कुछ ही दिन पहले ज़ाहिरा शेख़ ने बयान पलटते हुए कहा था कि मानवाधिकार संगठनों ने ज़बरदस्ती उसके बयान दिलाए और उसने उन्हीं के कहने पर मुक़दमा फिर से चलाए जाने की माँग की थी.

ज़ाहिरा शेख़ पिछली तारीख़ पर अदालत में भी पेश नहीं हुई थी.

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