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बेस्ट बेकरी काँड की दोबारा सुनवाई शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात 2002 में हुए दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी आगज़नी के अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुंबई की एक विशेष अदालत में सोमवार को फिर से मुक़दमा शुरू हुआ. इस मामले में 16 लोगों पर हत्या करने के आरोप लगाए गए हैं. इस मुक़दमे की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत के आसपास सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं. दंगों के दौरान मार्च में एक भीड़ ने बड़ोदा की बेस्ट बेकरी को आग लगा दी थी जिसमें 14 लोग ज़िंदा जल गए थे. मृतकों में 12 मुसलमान थे. गुजरात में इस मामले की सुनवाई में सभी गवाहों के बयान बदल दिए जाने के बाद पिछले साल सभी 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था. तब बेस्ट बेकरी आगज़नी काँड की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि उन्हें डराया धमकाया गया था इसलिए उन्होंने अपनी जान का ख़तरा देखते हुए अदालत में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ अपने बयान बदल दिए थे. ज़ाहिरा शेख़ और मानवाधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि इस मामले की नए सिरे से सुनवाई कराई जाए लेकिन गुजरात से बाहर कहीं और. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की एक विशेष अदालत में बेस्ट बेकरी मामले की जाँच के आदेश दिए थे. इसके बाद विवाद ये शुरू हुआ कि सरकारी वकील गुजरात का होगा या महाराष्ट्र का. इस मामले में एक बार फिर उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था और महाराष्ट्र की ओर से सरकारी वकील की नियुक्ति का फ़ैसला हुआ था. काला अध्याय मानवाधिकार संगठनों का कहना है गुजरात में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़के दंगों ने देश की सरकार, न्याय प्रणाली और पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगा दिए. गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने हिंदू कट्टरपंथियों को मुसलमानों पर हमले करने के लिए उकसाया था और ऐसे भी आरोप लगे थे कि पुलिस ने भी अपनी ड्यूटी नहीं निभाई. बेस्ट बेकरी काँड की नए सिरे से गुजरात से बाहर सुनवाई होने से यह उम्मीद बनी है कि पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा. |
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