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बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई टली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई की एक विशेष अदालत में गुजरात के बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई 21 जून तक के लिए टाल दी गई है. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद फिर से बेस्ट बेकरी अग्निकांड की सुनवाई महाराष्ट्र में हो रही है. लंबी बहस के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अप्रैल को आदेश दिया था कि बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई गुजरात के बजाय महाराष्ट्र में कराई जाए जिसके तहत मुंबई की एक सत्र अदालत में सुनवाई सोमवार को शुरू हो रही है. इस सुनवाई के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अभय थिप्से की एक विशेष अदालत बनाई गई है. अभय थिप्से को महाराष्ट्र में क़ानून का असाधारण विशेषज्ञ माना जाता है. वह इस समय महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण क़ानून यानी म्कोका के जज है. समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने बेस्ट बेकरी मामले के सभी गवाहों को मुफ़्त सुरक्षा और ठहरने की सुविधा मुहैया कराने के की घोषणा की है. सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने गुजरात सरकार की अपील ख़ारिज कर दी थी जिसमें बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई गुजरात से बाहर कराने के सुप्रीम कोर्ट के ही एक फ़ैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया गया था. लंबा विवाद मार्च 2002 में हुए दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी हत्याकांड में 14 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था. पिछले साल मई में एक अदालत ने सभी गवाहों के अपने बयानों से पलट जाने के बाद इस मामले के सभी 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया था.
इस मामले की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ सहित अनेक गवाहों ने अदालत में अपने बयान बदल दिए थे और कहा था कि वे उन अभियुक्तों को नहीं पहचानते. इस मामले में सभी 21 अभियुक्तों को बरी किए जाने के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की नए सिरे से जाँच और महाराष्ट्र में सुनवाई कराने का आदेश दिया था. अभियुक्तों को बरी किए जाने के बाद ज़ाहिरा शेख़ ने बयान दिया था कि उन्हें और अन्य अभियुक्तों को जान से मारने की धमकियाँ दी गईं जिसकी वजह से उन्होंने अदालत में अपने बयान बदले थे. तब भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और एक ग़ैरसरकारी संगठन यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में ले गए थे. सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में नए सिरे से सुनवाई कराने के आदेश के बाद तीन अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. |
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