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अपील में कोई दम नहीं:न्यायालय
गुजरात उच्च न्यायालय ने बेस्ट बेकरी आगज़नी काँड मुक़दमे की सुनवाई फिर से शुरू करने की सरकार की अपील ख़ारिज करने के कारण बताए हैं. बेस्ट बेकरी हत्याकाँड के 21 हिंदू अभियुक्तों को पिछले साल जून में एक निचली अदालत से रिहाई मिल गई थी. बड़ोदा के बाहरी इलाक़े में स्थित बेस्ट बेकरी में कुछ दंगाइयों ने आग लगा दी थी जिसमें 14 लोग ज़िंदा जल गए थे. इस मुक़दमे की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ सहित ज़्यादातर गवाहों ने अपने बयान बदल दिए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उन्हें डराया धमकाया था जिसकी वजह से उन्होंने अदालत में अपने बयान बदले. कुछ मानवाधिकार संगठनों की आलोचना के बाद सरकार ने इस मुक़दमे के अभियुक्तों की रिहाई को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. साथ ही सरकार ने अपील की थी कि इस पूरे मुक़दमे की फिर से सुनवाई की जाए. दम नहीं उच्च न्यायालय गत 26 दिसंबर को सरकार की यह अपील ख़ारिज कर दी थी. उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बीजे सेठना और न्यायमूर्ति जेआर वोरा के खंडपीठ ने मंगलवार को 90 पन्नों का फ़ैसला देते हुए कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष अपनी ड्यूटी निभाने में बुरी तरह नाकाम रहा है.
"अभियोजन पक्ष को इस मुक़दमे की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ का बयान घटनास्थल पर ही दर्ज करना चाहिए था और उसी समय रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए थी." लेकिन न्यायालय ने कहा है कि सिर्फ़ इस आधार पर इस मुक़दमे की फिर से सुनवाई नहीं की जा सकती कि अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए. न्यायालय का कहना था, "हम पूरी तरह संतुष्ट हैं कि इस अपील में कोई दम नहीं है इसलिए इसे ख़ारिज किया गया है." न्यायालय ने प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ के प्रेस के सामने दिए गए बयानों पर भी शक़ ज़ाहिर किया है. ज़ाहिरा शेख़ ने प्रेस को बताया था कि उसने धमकियाँ मिलने के बाद अदालत में अपना बयान बदल दिया था. अब उच्च न्यायालय ने कहा है, "ऐसा लगता है कि इस गवाह ज़ाहिरा बीबी के ज़रिए कुछ लोगों को बदनाम करने की साज़िश रची जा रही है." न्यायालय ने कहा है कि ज़ाहिरा शेख़ सिर्फ़ 19 साल की महिला हैं और वह राष्ट्र या समाज विरोधी तत्वों के भी बहकावे में आसानी से आ सकती हैं. इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिस पर 16 जनवरी को सुनवाई होनी है. |
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