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गुजरात सरकार को फिर मिली फटकार
बेस्ट बेकरी
गुजरात दंगों के दौरान हुआ था बेस्ट बेकरी कांड
बेस्ट बेकरी मामले में सरकारी वकील की नियुक्ति में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर गुजरात सरकार को फटकार लगाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह के अंदर राज्य पुलिस से इस मामले के अभियुक्तों के ख़िलाफ़ उठाए जा रहे क़दमों का ब्यौरा भी माँगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सरकारी वकील की नियुक्ति करते समय पीड़ितों की माँग और सलाह का भी ख़्याल करे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो पीड़ितों ने जो चार वकीलों के नाम दिए हैं उनमें से एक को नियुक्त किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 अगस्त तक के लिए टाल दी है.

जस्टिस अरीजित पसायत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि इस मामले में गुजरात सरकार द्वारा नियुक्त वकील ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ जारी ग़ैर ज़मानती वारंट का विरोध किया था.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही यह मामला गुजरात से महाराष्ट्र भेजा गया है.

खंडपीठ ने सरकारी वकील के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा, "आप पहले ही दिन से अपना रंग दिखा रहे हैं. आप किस तरह के के सरकारी वकील हैं जो उन अभियुक्तों के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट का विरोध कर रहे हैं जो अदालत में पेश नहीं हुए."

मामला

बेस्ट बेकरी मामले में सरकारी वकील की नियुक्ति का मामला उस समय सुप्रीम कोर्ट पहुँचा जब मामले की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ ने उससे दख़ल देने की माँग की.

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ज़ाहिरा शेख़ हैं इस मामले की प्रमुख गवाह

दरअसल गुजरात और महाराष्ट्र सरकारें इस मामले में अपने-अपने वकील नियुक्त करने की बात कर रहीं थीं.

महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने मामला महाराष्ट्र भेजा है इसलिए सरकारी वकील उसी का होगा लेकिन गुजरात सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ इस मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया है इसलिए वकील उसी का होगा.

मार्च 2002 में हुए दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी हत्याकांड में 14 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था.

पिछले साल मई में एक अदालत ने सभी गवाहों के अपने बयानों से पलट जाने के बाद इस मामले के सभी 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया था.

इस मामले की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ सहित अनेक गवाहों ने अदालत में अपने बयान बदल दिए थे और कहा था कि वे उन अभियुक्तों को नहीं पहचानते.

इस मामले में सभी 21 अभियुक्तों को बरी किए जाने के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की नए सिरे से जाँच और महाराष्ट्र में सुनवाई कराने का आदेश दिया था.

अभियुक्तों को बरी किए जाने के बाद ज़ाहिरा शेख़ ने बयान दिया था कि उन्हें और अन्य अभियुक्तों को जान से मारने की धमकियाँ दी गईं जिसकी वजह से उन्होंने अदालत में अपने बयान बदले थे.

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