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बिलक़ीस ने न्याय की उम्मीद जताई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात में फ़रवरी 2002 में शुरू हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई बिलक़ीस बानो ने उम्मीद जताई है कि उनके मामले की सुनवाई गुजरात के बजाय महाराष्ट्र में होने से न्याय मिल सकेगा. ग़ौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इसी महीने आदेश दिया था कि बिलक़ीस बानो बलात्कार और सामूहिक हत्याकाँड मामले की सुनवाई गुजरात की बजाय महाराष्ट्र में कराई जाए. इससे पहले बेस्ट बेकरी हत्याकाँड मामले की सुनवाई भी गुजरात के बजाय महाराष्ट्र में कराने के आदेश दिए गए थे. बिलक़ीस बानो बलात्कार और सामूहिक हत्याकाँड मामले में तहकीकात करने के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई 20 लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाख़िल कर चुकी है. बिलक़ीस बानो ने आरोप लगाया था कि गुजरात में मार्च 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और उनके 14 रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई. रविवार को अहमदाबाद में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पत्रकारों से बातचीत में बिलक़ीस ने कहा, "मैं चाहती हूँ कि यह मामला अपनी न्यायिक परिणति तक पहुँचे. मैंने किसी भी मोड़ पर हिम्मत हारने के बारे में नहीं सोचा." ठिकाना नहीं बिलक़ीस बानो का कहना था कि दोषियों को एक बार सज़ा हो जाने के बाद वह ख़ुद गुजरात में ही सामान्य जीवन जीना चाहती हैं लेकिन इस वक़्त वह ख़ुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर ही हैं.
बिलक़ीस ने कहा कि उस घटना के बाद से वह बीस बार अपना रहने का ठिकाना बदल चुकी हैं और उन्हें लगातार धमकियाँ मिलती रहती हैं. बिलक़ीस बानो बलात्कार के समय गर्भवती थीं और उनका कहना है कि तीन अन्य महिलाओं के साथ भी बलात्कार को उन्होंने अपनी आँखों से देखा था. उनका कहना है कि वह इसलिए जीवित बच सकीं क्योंकि उन पर हमला करने वाले उन्हें मरा हुआ समझकर छोड़कर चले गए. बिलक़ीस बानो ने कहा कि उन्होंने बलात्कार करने वालों के नाम गुजरात पुलिस को बता दिए थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई और मामले को बंद कर दिया गया. गुजरात सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि उसने सांप्रदायिक दंगों को रोकने के लिए ठोस क़दम नहीं उठाए. |
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