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गुजरात दंगे एक धब्बा:आडवाणी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समाचार एजेंसियों के अनुसार भारत के उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने सन 2001 में हुए गुजरात दंगों को राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार के शासन में एक 'धब्बा' बताया है. उन्होंने दावा किया है कि गोधरा कांड और गुजरात दंगों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के अलावा पिछले छह साल में सरकार की कोशिशों के कारण देश में सुरक्षा और विकास की स्थिति बेहतर हुई है. जहाँ उप प्रधानमंत्री आडवाणी की इस टिप्पणी पर कट्टरपंथी हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद ने तीखी आलोचना की है वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे एक नाटक बताया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार उप प्रधानमंत्री आडवाणी का कहना था, "यदि गोधरा की घटना न हुई होती तो उसके बाद के दंगे भी न होते... ये घटनाएँ दुर्भाग्यपूर्ण थीं और स्थिति सुधारने के लिए सब ज़रूरी कदम उठाए गए." उनका कहना था कि छह साल पहले देश में 'आतंकवाद और चरमपंथ' का ज़ोर पकड़ रहा था लेकिन अब सरकार के प्रयासों से आंतरिक सुरक्षा का माहौल बहुत बेहतर हुआ है. प्रतिक्रिया लेकिन कट्टरपंथी हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया की ओर से उप प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आई है. समाचार माध्यमों के अनुसार प्रवीण तोगड़िया ने आरोप लगाया कि भारत में 'हिंदुओं पर आरोप लगाना एक फ़ैशन बन गया है जबकि जेहादियों का नाम तक नहीं लिया जाता.' उनका कहना था, "दुर्भाग्यपूर्ण है कि गोधरा में 47 हिंदुओं को जलाकर मार डालना आडवाणी जी को धब्बा नहीं लगता....मंदिरों पर हमले, अमरनाथ के श्रद्धालुओं और संसद पर हमले काले धब्बे नहीं हैं." दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य अहमद अली क़ाज़मी का उप प्रधानमंत्री आडवाणी की टिप्पणी पर कहना था कि ये सब एक नाटक है. उनका कहना था कि यदि दंगों के लिए दोषी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के प्रति कोई गंभीरता होती तो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उस पद से बहुत पहले हटा दिया गया होता. |
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