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बीती बातों को भूलकर आगे बढ़ें:वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी का चित्र
भाजपा के चुनाव प्रचार का नुस्ख़ा

भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात के लोगों से कहा है कि वे 2002 में हुई हिंसा को भूल जाएं और भाईचारे और विकास के एक नए दौर में दाख़िल होने की कोशिश करें.

उन्होंने अपने गुजरात दौरे के दौरान बुधवार को ख़ासकर अहमदाबाद के लोगों से यह आहवान किया.

वाजपेयी ने विश्व गुजराती परिवार महोत्सव का उदघाटन करते हुए यह बात कही. इस महोत्सव का आयोजन गुजरात सरकार ने किया है.

वाजपेयी ने कहा, "सबके दिलों से यह आवाज़ आनी चाहिए कि 2002 में जो भी कुछ हुआ हम वह सब कुछ भूलने के लिए तैयार हैं. हम माफ़ी माँगें भी और माफ़ी दें भी."

"आख़िर ज़हर कब तक मन में रखा जा सकता है और कब तक आग भड़काए रखी जा सकती है."

बेस्ट बेकरी

ग़ौतरतलब है कि वाजपेयी के इस आहवान से एक दिन पहले मंगलवार को उच्च न्यायालय ने बड़ोदा के बेस्ट बेकरी हत्याकाँड मुक़दमें में निचली अदालत के फ़ैसले को बरक़रार रखा था और इसकी फिर से सुनवाई नहीं करने की अपील रद्द करने के कारण बताए थे.

गुजरात में दंगे
दंगे महीनों तक जारी रहे थे

इस हत्याकाँड के सभी 21 अभियुक्तों को पिछले साल जून में एक विशेष अदालत से रिहाई मिल गई थी.

मामले के अनेक गवाहों ने आरोप लगाए थे कि उन्होंने जान से मारने की धमकियाँ मिलने के बाद अदालत में अपने बयान बदल दिए थे.

कुछ मानवाधिकार संगठनों के हस्तक्षेप और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर बाद गुजरात सरकार ने उच्च न्यायालय से इस मामले की फिर से सुनवाई करने की अपील की थी जिसे न्यायालय ने 26 दिसंबर को रद्द कर दिया था.

मंगलवार को न्यायालय ने कारण बताते हुए कहा कि इस अपील में दम नहीं था और इस पूरे मामले में पुलिस ने पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए.

ग़ौरतलब है कि 2002 में फ़रवरी में गोधरा के पास एक रेलगाड़ी में आगज़नी की घटना के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए थे.

रेलगाड़ी में आगज़नी की उस घटना में 58 लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर हिंदू थे.

आग को दफ़्न करें

 अब आग किसी का घर ना जलाए बल्कि सभी तरह की आग को दिलों में ही दफ़्न कर दिया जाना चाहिए

अटल बिहारी वाजपेयी

उसके बाद भड़के दंगों में क़रीब दो हज़ार लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.

नया युग

प्रधानमंत्री ने बुधवार को कहा कि अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए और ख़ूनख़राबा बिल्कुल बंद करना होगा.

"अब आग किसी का घर ना जलाए बल्कि सभी तरह की आग को दिलों में ही दफ़्न कर दिया जाना चाहिए."

वाजपेयी ने कहा कि दोषियों को सज़ा ज़रूर मिलनी चाहिए लेकिन माफ़ी देने वाला दंडित करने वाले से महान होता है.

पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत शांति के साथ रहना चाहता है लेकिन कोई नुक़सान या ख़तरा उठाकर नहीं.

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