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'अयोध्या का हल भी निकल सकता है'
भारत में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हैदराबाद बैठक में यह ताज्जुब की बात ही थी कि अयोध्या मसले का ज़िक्र नहीं हुआ. हालाँकि अयोध्या मसला पिछले क़रीब दो दशकों से तमाम चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बनता रहा है लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी अपनी कार्यकारिणी की बैठक में इस मसले में ज़्यादा दिलचस्पी लेती नज़र नहीं आई. ज़्यादा ज़ोर आम चुनाव जल्दी कराए जाने पर ही रहा लेकिन पार्टी का एक धड़ा अयोध्या मसले का ज़िक्र नहीं होने पर कुछ नाराज़ सा भी दिखा. बहरहाल कार्यकारिणी की बैठक समाप्त होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण ने मंगलवार को अयोध्या मसले के बारे में अपनी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने हैदराबाद में कहा कि अयोध्या मसले को भी उसी तरह सुलझाया जा सकता है जो तरीक़ा भारत-पाकिस्तान संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अपनाया जा रहा है.
आडवाणी ने अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों की बैठक में कहा, "जो सफ़लता इस्लामाबाद में मिली बिल्कुल वैसा ही तरीक़ा अपनाकर अयोध्या विवाद को भी सुलझाया जा सकता है और हम जल्दी ही वहाँ राम मंदिर का निर्माण होते हुए देख सकते हैं." आडवाणी ने ध्यान दिलाया कि इस दिशा में कुछ लोग प्रयास कर रहे हैं और इन प्रयासों का आज नहीं तो कल ज़रूर फल मिलेगा. उन्होंने कहा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों ने यह समझा है कि वे अब तक जो भी फ़ैसले लेते रहे हैं उनसे किसी भी देश को कोई फ़ायदा नहीं हो रहा था. उन्होंने कहा है कि शांति वार्ता को आगे बढ़ाने का फ़ैसला करना दोनों ही देशों के लिए अच्छी स्थिति है क्योंकि इससे अमन और भाईचारे को बढ़ावा मिलेगा. टिप्पणी नहीं लाल कृष्ण आडवाणी ने काँग्रेस अध्यक्ष के उस बयान पर भी ख़ासा ऐतराज़ किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी ने देश को बर्बाद कर दिया है. उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी के इस तरह के बयानों पर तरस ही खाया जा सकता है. आडवाणी ने यह भी कहा कि वे इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि सामने वाला भी समान क़द का होना चाहिए. ज्ञात रहे कि भारतीय जनता पार्टी की कार्यकारिणी ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में कहा है कि देश के प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर भारतीय मूल का व्यक्ति ही बैठना चाहिए. |
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