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मोदी को वीज़ा मामले ने तूल पकड़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने कहा है कि वह नरेंद्र मोदी को वीज़ा नहीं देने के फ़ैसले के संबंध में अमरीका सरकार से बातचीत करेगी. अमरीका ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमरीका यात्रा के लिए वीज़ा देने से इनकार कर दिया है. भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने दिल्ली में कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात कर स्थिति पर विचार किया है. नटवर सिंह ने इससे पहले ये भी कहा था कि वे मोदी को वीज़ा नहीं देने के फ़ैसले के बारे में अमरीकी अधिकारियों से सभी तथ्य माँगेंगे. उधर नरेंद्र मोदी ने फ़ैसले को अलोकतांत्रिक बताया है. अहमदाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि अमरीका का ये फ़ैसला 'भारतीय संविधान और आत्मसम्मान' का अपमान है. उन्होंने अमरीका पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया. मोदी ने कहा कि एक तरफ़ तो उन्हें वीज़ा देने से इनकार किया गया है और उधर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का स्वागत किया जा रहा है जिनपर भारत आतंकवाद को शह देने का आरोप लगाता है. इनकार दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि नरेंद्र मोदी ने कूटनयिक वीज़ा के लिए आवेदन किया था लेकिन उनका आवेदन ठुकरा दिया गया. अमरीकी दूतावास के अधिकारी के मुताबिक़,''नरेंद्र मोदी को पहले दिया गया टूरिस्ट/ बिज़नेस वीज़ा भी रद्द कर दिया गया है.'' अमरीकी दूतावास के प्रवक्ता का कहना था कि मोदी का पर्यटक / बिज़नेस वीज़ा धारा 212 के तहत रद्द किया गया है. इसमें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार शख्स का वीज़ा रद्द किए जाने का प्रावधान है. इस पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. भाजपा नेता और पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि पार्टी इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएगी. इस सप्ताह दो अमरीकी सांसदों ने संसद में गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका की आलोचना संबंधी एक प्रस्ताव रखा था. हॉउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में रखे प्रस्ताव में सांसद जॉन कॉनयेर्स और जोय पिट्स ने आरोप लगाया था कि नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों और ईसाइयों के ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाएँ भड़काईं थीं. नरेंद्र मोदी को अमरीका में कई स्थानों पर भारतीय समुदाय को संबोधित करना था. सांप्रदायिक दंगे ग़ौरतलब है कि मार्च 2002 में गुजरात के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे जिनमें लगभग दो हज़ार लोग मारे गए थे. मारे गए लोगों में ज़्यादातर मुसलमान थे. इसको लेकर मानवाधिकार संगठनों ने नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना की थी लेकिन वो सत्ता में बने रहे. यहाँ तक कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात दंगों को पार्टी की हार की एक प्रमुख वजह बताई थी और कहा था कि दंगों के बाद नरेंद्र मोदी को न हटाना बड़ी ग़लती थी. उन्होंने यह कहकर पार्टी में नया विवाद खड़ा कर दिया था. लेकिन बाद में वाजपेयी ने कहा कि नरेंद्र मोदी का मुद्दा पुराना पड़ गया है और अब पार्टी को भविष्य पर चर्चा करनी चाहिए. |
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