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मोदी से 22 करोड़ के मुआवज़े की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 13 अन्य लोगों के विरुद्ध भारतीय मूल के तीन ब्रितानी नागरिकों ने गोधरा के सांप्रदायिक दंगों में मारे गए लोगों के मुआवज़े में 22 करोड़ रुपए की माँग करते हुए हिम्मतनगर की अदालत में याचिका दायर की है. मोदी के साथ ही याचिका में गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री और पुलिस महानिदेशक को भी पक्ष बनाया गया है. याचिका शिरीन दाऊद और समीमा दाऊद के साथ ही इमरान मोहम्मद और सलीम दाऊद ने दायर की है. इनकी माँग है कि सरकार सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रही जिसकी वजह से दंगे में वे लोग मारे गए और इसके लिए सरकार उन्हें 22 करोड़ 17 लाख रुपए का मुआवज़ा दे. इमरान मोहम्मद 2002 में हुए दंगों में घायल हुए थे जबकि अन्य दोनों याचिकाकर्ताओं के पति उन दंगों में मारे गए थे. वे ब्रितानी नागरिक थे. हिम्मतनगर के सिविल जज ने याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए छह मई की तारीख़ तय की है. पुलिस के अनुसार 28 फ़रवरी 2002 को एक भीड़ ने एक गाड़ी को रोका और उसमें बैठे दोनों ब्रितानी नागरिकों को कथित तौर पर जलाकर मार डाला. गाड़ी का ड्राइवर भी गंभीर रूप से घायल हुआ था. ग़ौरतलब है कि मार्च 2002 में गुजरात के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे जिनमें लगभग दो हज़ार लोग मारे गए थे. मारे गए लोगों में ज़्यादातर मुसलमान थे. |
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