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सरकार पोटा मामले में अदालत में जाएगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की केंद्र सरकार ने गुजरात के गोधरा रेल कांड के सभी 120 अभियुक्तों के ख़िलाफ आतंकवाद निरोधक क़ानून(पोटा) से जुड़े मामले हटाने के लिए अदालत की शरण में जाने का फ़ैसला किया है. सरकार ने पोटा समीक्षा समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप ये क़दम उठाने का फ़ैसला किया है. उल्लेखनीय है कि गुजरात की नरेन्द्र मोदी सरकार अभियुक्तों पर से पोटा मामले हटाने के ख़िलाफ़ है. दिल्ली में केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यूपीए) सरकार और वाम दलों की समन्वय समिति की बैठक के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार पोटा समीक्षा समिति की अनुशंसाओं को लागू कराएगी. उन्होंने कहा, "गुजरात सरकार माने या नहीं, अनुशंसाओं को लागू कराया जाएगा." रविवार की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की प्रमुख सोनिया गाँधी, वित्त मंत्री पी चिदंबरम और गृह मंत्री शिवारज पाटिल भी शामिल थे. अनुशंसा उल्लेखनीय है कि तीन सदस्यीय पोटा समीक्षा समिति ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के कोच को जलाए जाने के मामले में अभियुक्त 120 लोगों पर से पोटा मामले हटाने की अनुशंसा की थी. समिति ने कहा था कि उसे इस बात के सबूत नहीं मिले की 27 फ़रवरी 2002 को किसी आतंकवादी योजना के तहत गोधरा में रेल कोच को जलाया गया था. समिति के अनुसार गोधरा कांड ट्रेन यात्रियों और रेल स्टेशन पर कार्यरत वेंडरों के बीच झड़प का नतीज़ा था. वेंडरों में से अधिकांश मुसलमान थे. पोटा समीक्षा समिति ने अभियुक्त पर मामले भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत चलाए जाने की अनुशंसा की थी. साबरमती एक्सप्रेस का एक कोच जलाए जाने की घटना में में 59 हिंदुओं की मौत हो गई थी. |
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