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गोधरा कांड के दो अभियुक्त बरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के गुजरात राज्य में फ़रवरी 2002 में हुए रेल आगज़नी कांड के दो अभियुक्तों को अहमदाबाद की एक अदालत ने बरी कर दिया है. उस रेलगाड़ी में हिंदू तीर्थयात्री अयोध्या से लौट रहे थे और गोधरा स्टेशन पर उसमें कथित तौर पर कुछ लोगों ने आग लगा दी थी जिसमें 59 हिंदू तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी. 28 फ़रवरी को हुए इस हादसे के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे जो कई महीने तक चले. दंगों में 1000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे. ग़ैरसरकारी संगठन मृतकों की संख्या 2000 से ज़्यादा बताते हैं. गोधरा आगज़नी कांड में शामिल होने के आरोप में 99 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें से दो अभियुक्तों - यूसुफ़ पटेल और इमरान ग़नी को अहमदाबाद की एक अदालत ने शुक्रवार को बरी कर दिया. सरकारी वकील ने कहा कि कोई भी गवाह इन दोनों अभियुक्तों पर लगे आरोप साबित नहीं कर सका. नई जाँच पुलिस के विशेष जाँच दल ने कुछ रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी जिसके बाद पटेल और ग़नी को रिहा किया गया है. सरकारी वकील एचएम ध्रुव ने बीबीसी को बताया, "इससे झलकता है कि विशेष जाँच दल निष्पक्षता से काम कर रहा है. इन दोनों अभियुक्तों पर लगे आरोप साबित नहीं हुए क्योंकि किसी भी गवाह ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया कि वे आगज़नी कांड में शामिल थे या नहीं."
"इसलिए हमने अदालत से उन्हें बरी करने की गुज़ारिश की." ये दोनों पहले ऐसे अभियुक्त हैं जिन्हें गोधरा आगज़नी कांड में बरी किया गया है. घटना को हुए क़रीब ढाई साल बाद. गोधरा आगज़नी कांड का मुक़दमा अभी अहमदाबाद की अदालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लंबित है. इस मुक़दमे के ज़्यादातर अभियुक्तों को हिरासत में रखा गया है. इस समय एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली एक समिति गोधरा रेल आगज़नी कांड की नए सिरे से जाँच-पड़ताल कर रही है. रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस साल जुलाई में इस मामले की नए सिरे से जाँच के लिए यह समिति गठित की थी जिसका भारतीय जनता पार्टी ने विरोध किया था. भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि इस जाँच से अभियुक्तों को बचने का रास्ता मिल सकता है. |
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