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मुझसे कोई राय नहीं ली गई:चक्रवर्ती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात के पूर्व पुलिस प्रमुख के चक्रवर्ती ने कहा है कि फ़रवरी 2002 में हुए गोधरा काँड के समय क़ानून और व्यवस्था के बारे में लिए गए बहुत से महत्वपूर्ण फ़ैसलों के वक़्त उनसे कोई राय नहीं ली गई. राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक के चक्रवर्ती ने गोधरा रेल अग्निकाँड की जाँच कर रहे दो सदस्यों वाले एक पैनल के सामने यह बयान दिया है. पैनल ने गोधरा काँड के कुछ अभियुक्तों पर आतंकवाद निरोधक क़ानून पोटा लगाने के बारे में भी चक्रवर्ती से पूछताछ की है. चक्रवर्ती ने पैनल को बताया है कि शुरू में अभियुक्तों पर पोटा लगाने के मामले में जाँच अधिकारी ने अन्य अधिकारियों से तो सलाह मशविरा किया लेकिन ख़ुद उनसे कोई राय नहीं ली गई. पूर्व पुलिस महानिदेशक ने बताया है कि यहाँ तक कि बाद में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ पोटा वापस लेने के समय भी वे कहीं तस्वीर में नहीं थे. बाद में क़रीब एक साल बाद इन अभियुक्तों के ख़िलाफ़ फिर से पोटा लगाया गया था. ग़ौरतलब है कि 28 फ़रवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में एक रेलगाड़ी में आग लगा दी गई थी जिसमें 59 लोग मारे गए थे. इस घटना के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए थे जो कई महीने तक जारी रहे. चक्रवर्ती ने पैनल को यह भी बताया है कि राज्य पुलिस के पास ऐसी कोई ख़ुफ़िया जानकारी नहीं थी कि गोधरा रेलकाँड जैसी कोई घटना होने वाली है. पूर्व पुलिस प्रमुख चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि अक्षरधाम मंदिर पर हुए हमले के बारे में भी पुलिस के पास कोई ख़ुफ़िया सूचना नहीं थी. इस हमले में तीस लोग मारे गए थे. |
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