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सोमवार, 13 सितंबर, 2004 को 18:04 GMT तक के समाचार
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जिस्मानी ज़रूरत के लिए ज़मानत नहीं
जेल
फ़िरोज़ ख़ान ने मानवता के नाते केंद्र से ज़मानत की अपील की थी जिसे अदालत ने ठुकरा दिया
गुजरात में एक अदालत ने गोधरा रेल काँड के एक अभियुक्त को जिस्मानी ज़रूरत के लिए ज़मानत देने से इनकार कर दिया है.

फ़िरोज़ ख़ान नाम के इस अभियुक्त ने अदालत से ये कहते हुए ज़मानत की अपील की थी कि अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध ना रख पाने के कारण उसे और उसकी पत्नी को मानसिक यंत्रणा झेलनी पड़ रही है.

अदालत के फ़ैसले की जानकारी देते हुए मामले में सरकारी वकील के सहायक ने बीबीसी को बताया कि अदालत का ये कहना था कि फ़िरोज़ ने जिस आधार पर ज़मानत माँगी है उसका क़ानून में प्रावधान ही नहीं है.

सहायक वकील सुधीर ब्रह्मभट्ट ने बताया कि साथ ही न्यायाधीश ने ये भी कहा कि फ़िरोज़ के ना तो मौलिक और ना ही संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है.

फ़िरोज़ ने अदालत को मानवता के आधार पर विचार करने का आग्रह किया था.

फ़रवरी 2002 में घटित गोधरा काँड के सिलसिले में 99 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है जिनमें फ़िरोज़ भी शामिल हैं.

केंद्र सरकार ने इसी महीने गोधरा में रेलगाड़ी में आग लगने की जाँच करवाने का एलान किया था.

केंद्र ने जाँच की ज़िम्मेदारी सेवानिवृत्त न्यायाधीश यू सी बनर्जी पर सौंपी है जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे.

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