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'भाजपा नेताओं ने पुलिस को रोका था' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरबी श्रीकुमार ने सांप्रदायिक दंगों की जाँच कर रहे आयोग को बताया है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पुलिस को हिंसा पर क़ाबू पाने के लिए ड्यूटी निभाने से रोका था. ग़ौरतलब है कि गुजरात में फ़रवरी 2002 में गोधरा में एक रेलगाड़ी को आग लगाए जाने की घटना के बाद बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे जो कई महीनें तक जारी रहे. दंगों में 2000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. दंगे भड़कने के दो महीने बाद आरबी श्रीकुमार ने राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तचर) का कार्यभार संभाला था. दो सदस्यों वाला एक आयोग उन दंगों की जाँच कर रहा है. श्रीकुमार ने आयोग को बताया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने उनके विभाग को यह बताया था कि दंगों के दौरान वह निस्सहाय और अक्षम महसूस कर रहे थे क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के ही निर्देश माने जा रहे थे. श्रीकुमार ने किसी नेता का नाम यह कहते हुए नहीं बताया कि इससे उन्हें सूचना देने वाले सूत्रों की पहचान खुल सकती है.
उन्होंने बताया कि पुलिस अपनी कार्रवाई मई में ही शुरू कर सकी जबकि दंगे फ़रवरी में भड़के थे. श्रीकुमार ने आयोग को बताया कि पुलिस के पास इस तरह की कोई ख़ुफ़िया सूचना नहीं थी कि गोधरा रेल अग्निकांड किसी साज़िश का नतीजा था. उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया विभाग को नाकाम रहने का दोषी तभी ठहराया जा सकता है जब उसके पास ऐसी कोई सूचना हो और उस पर कार्रवाई न की जाए. श्रीकुमार ने यह भी बताया कि उन्होंने अप्रैल 2002 में सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में साफ़ कहा था कि दंगों से मुसलमानों में दहशत फैली हुई है. श्रीकुमार ने बताया कि उन्होंने अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आगाह किया था कि हिंदू धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक ठिकानों पर हमले हो सकते हैं. |
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