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मोदी को हटाने की योजना नहीं: भाजपा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात के विवादास्पद मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को तत्काल हटाए जाने की संभावना से इनकार किया है. भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा कि इस समय मोदी को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. पार्टी की मुंबई में होनेवाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से दो दिन पहले रविवार को दिल्ली में यह बैठक हुई. आम चुनाव में हार और इस संदर्भ में गुजरात दंगों को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पिछले दिनों की गई टिप्पणियों को देखते हुए बैठक का महत्व बढ़ गया था. मुंबई में 22 से 24 जून तक पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होनी है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार वेंकैया नायडू ने कहा कि इस साल के आम चुनावों में पार्टी की हार के कारणों की जाँच के लिए एक छोटी समिति बनाई जा रही है. उन्होंने बताया कि उस समिति की रिपोर्ट पर जुलाई में एक विशेष सत्र में विचार किया जाएगा. संसदीय बोर्ड भाजपा में संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे अहम निर्णायक संस्था है और इसमें नौ सदस्य हैं. पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के अलावा इस बोर्ड में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, जसवंत सिंह, सुषमा स्वराज, प्रमोद महाजन, अरूण जेटली और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं. बैठक वेंकैया नायडू के आवास पर हुई. वाजपेयी और गुजरात ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों मनाली में छुट्टियों के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात और नरेंद्र मोदी के बारे में कड़ी टिप्पणियाँ की थीं.
उन्होंने हार के लिए गुजरात के दंगों को एक प्रमुख कारण बताया था और कहा था कि नरेंद्र मोदी के संबंध में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कोई भी फ़ैसला हो सकता है. मगर पार्टी नेतृत्व ने इससे इनकार करते हुए कहा कि कार्यकारिणी में इस संबंध में बातचीत का कोई कार्यक्रम नहीं है. वाजपेयी के बयान के बाद भाजपा और संघ परिवार की संस्थाओं में ख़ासी सनसनी रही. उनके दिल्ली लौटने के बाद शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के समन्वयकर्ता मदन दास देवी के बीच बातचीत भी हुई. इस बीच वाजपेयी ने मनाली से दिल्ली लौटते वक़्त इस विषय में एक और बयान भी दिया जिससे ये मामला और पेचीदा हो गया. उन्होंने लौटते समय कहा कि नरेंद्र मोदी का मुद्दा पुराना पड़ चुका है और अब नई बातें होंगी. कहा जा रहा है कि भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक इसी जटिल परिस्थिति का हल तलाश करने की एक कोशिश थी. |
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