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वाजपेयी ज़िम्मेदारी स्वीकार करें: सिंघल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बाद विश्व हिंदू परिषद भी लोकसभा चुनावों के नतीजे के मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बचाव में उतरी है. साथ ही, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर निशाना साधा है. भाजपा की चुनावी हार के लिए गुजरात दंगों और नरेंद्र मोदी को दोषी ठहराए जाने पर आपत्ति जताई है. वरिष्ठ विहिप नेता अशोक सिंघल ने कहा, "अगर ऐसा होता तो गुजरात के दंगों के बाद विधानसभा चुनावों में भाजपा को जीत कैसे मिलती? यह बेकार की बात है. जिनके नेतृत्व में लोकसभा का चुनाव लड़ा गया उन्हें अपनी नाकामी स्वीकार करनी चाहिए." विश्व हिंदू परिषद ने न केवल वाजपेयी और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगाया बल्कि ये भी कहा कि पार्टी का नौजवान नेतृत्व सामने आए और शीर्ष नेताओं को संन्यास ले लेना चाहिए. विहिप नेताओं ने आरोप लगाया कि गुजरात पर वाजपेयी के बयान से गुजरात के ही नहीं बल्कि देश भर के हिंदू अपमानित हुए हैं. उनका कहना था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की नीतियों से जनता का मोहभंग हुआ और काँग्रेस की राह पर चलना भारतीय जनता पार्टी को मँहगा पड़ा. दोराहा जानकारों का कहना है कि चुनाव हारने के बाद से भारतीय जनता पार्टी में स्पष्ट रूप से दो ख़ेमे बन गए हैं. एक ख़ेमे का कहना है कि मोदी की नीतियों के कारण पार्टी को हार का मुँह देखना पड़ा जबकि दूसरा गुट मानता है कि हिंदुत्व की नीतियों को दरकिनार करने का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा. जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक हरीश खरे कहते हैं, "वाजपेयी की लाइन विहिप को पसंद नहीं, हिंदुत्व की बात पीछे रह गई, पाकिस्तान और मुसलमानों से दोस्ती की बात चल पड़ी, अब वाजपेयी सत्ता से हट गए हैं तो ये लोग हल्ला बोल रहे हैं." खरे कहते हैं कि लड़ाई मोदी के नाम पर शुरू हुई है लेकिन दूर तक जाएगी, भाजपा को अभी तय करने में कुछ समय लगेगा कि वे किधर जाएँगे, उदारवाद की ओर या मोदी के कट्टर हिंदुत्व की ओर. |
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