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गुजरात दंगों के मामलों पर पुनर्विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात के एडवोकेट जनरल यानि महाधिवक्ता से कहा है कि गुजरात में हुए दंगों से संबंधित उन सब मामलों पर पुनर्विचार करें जिनमें अदलतों ने अभियुक्तों को निर्दोष ठहराया है. लगभग ढ़ाई साल पहले गुजरात में हुए साप्रदायिक दंगों में मारे जाने वाले अधिकतर लोग मुस्लिम समुदाय से थे. गोधरा में 59 हिंदू श्रद्धालुओं के एक रेलगाड़ी में जलकर मारे जाने के बाद ये दंगों भड़के थे. सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात के महाधिवक्ता से कहा है कि वे चार महीने के भीतर उन्हें रिपोर्ट दें कि इन मामलों में आगे अपील करने की ज़रूरत है या नहीं. लगभग दो सौ अभियुक्तों को पहले ही स्थानीय अदालतें निर्दोष ठहरा चुकी हैं और उन्हें रिहा किया जा चुका है. पहले सर्वोच्च न्यायालय गुजरात दंगों से संबंधित दो मामलों को राज्य से बाहर महाराष्ट्र में सुने जाने के आदेश दे चुका है ताकि मुकदमा स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से चल सके. ब्रितानी मुसलमान एक अन्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दो ब्रितानी मुसलमानों के इन दंगों के दौरान मारे जाने के विषय में भी मुकदमा रोकने के आदेश दिए हैं. इस घटना में सईद दाऊद और शक़ील दाऊद को कथित तौर से जलाकर मार दिया गया था. इस घटना में जीवित बचे इमरान दाऊद ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. सर्वोच्च न्यायालय को बताया गया कि इमरान दाऊद को गुजरात पुलिस पर कोई विश्वास नहीं है और वे चाहते हैं केंद्रीय जाँच ब्यूरो इस मामलें की जाँच करे. |
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