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मोदी विरोधी मुहिम तेज़ हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ उनकी अपनी ही पार्टी के विधायकों का अभियान ज़ोर पकड़ता दिख रहा है. राज्य के 20 से अधिक असंतुष्ट विधायकों की बैठक आज होने जा रही है जिसमें वे अपनी आगे की रणनीति तय करने वाले हैं. एक असंतुष्ट महिला विधायक रमीला देसाई के पार्टी से निष्कासन के बाद से विधायकों की मुहिम तेज़ हो गई है. देसाई को रविवार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया है. देसाई को राज्य के मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के दो सहयोगियों के ख़िलाफ़ सार्वजनिक बयान देने की सज़ा मिली है. प्रदेश भाजपा के सचिव जयंती बारोट ने देसाई के निष्कासन के बाद एक कड़े बयान में कहा है कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. रमीला देसाई को पार्टी से छह वर्ष के लिए निकाल दिया गया है और उनसे कहा गया है कि वे एक सप्ताह के अंदर लिखित रूप से अपनी सफ़ाई पेश करें. गुजरात के अख़बारों में छपी रिपोर्टों में कहा गया है कि रमीला देसाई ने पत्र लिखकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से शिकायत की थी कि मुख्यमंत्री और उनके दो मंत्री उन्हें परेशान कर रहे हैं. इसी पत्र में उन्होंने लिखा है कि उन्हें धमकाया जा रहा है. बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लिखा गया शिकायती पत्र मीडिया को लीक कर दिया था. उनके निष्कासन को गुजरात भाजपा में नरेंद्र मोदी के समर्थक और विरोधी गुटों की आपसी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ लंबे समय से पार्टी के विधायक और अन्य नेता अभियान चलाते रहे हैं, उनकी माँग है कि मोदी को पद से हटाया जाए. मोदी पर आरोप मनमानी करने के आरोप लगते रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल सहित कई नेता माँग करते रहे हैं कि उन्हें हटाया जाए. |
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