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मोदी को वीज़ा नहीं, अल्पसंख्यक खुश. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में आमतौर पर मुस्लिम समुदाय ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वीज़ा न दिए जाने के निर्णय का स्वागत किया है. मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग से संबंध रखने वाली और मुंबई के ज़ेवेज कॉलेज की डॉ ज़ीनत शौकत अली ने नरेंद्र मोदी को वीज़ा न देने को सही ठहराया है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अमरीकी सरकार ने नरेंद्र मोदी को वीज़ा न देकर एक बहुत ही अच्छा निर्णय लिया है क्योंकि किसी भी स्थिति में न्याय की रक्षा होनी ही चाहिए.” वो बताती हैं, “नरेंद्र मोदी ने गुजरात के लोगों को न्याय नहीं दिया और कितने ही निर्दोष लोग उनके सामने मारे गए. अब यह तथ्य लोगों के सामने आ रहा है और इसलिए मेरी समझ में नरेंद्र मोदी को वीज़ा न देने का निर्णय ठीक था.” सबरन नाम की संस्था की तीस्ता सीतलवाड, जिन्होंने ज़ाहिरा शेख़ के मामले को अदालत तक पहुँचाने में मदद दी थी, भी नरेंद्र मोदी को वीज़ा न दिए जाने के निर्णय से खुश दिखाई दीं. इसी संगठन के जावेद आनंद अपनी प्रतिक्रिया कुछ इस तरह देते हैं, “इससे संकेत यह मिलते हैं कि नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोषी ठहराया जाना चाहिए और उनके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए.” ग़ौरतलब है कि पिछले साल नरेंद्र मोदी ने जब अपनी ब्रिटेन यात्रा के लिए वीज़ा माँगा था, उस समय भी उनको वीज़ा दिए जाने का मुस्लिम समुदाय ने ख़ासा विरोध किया था. हालांकि ब्रिटेन की सरकार ने यह कहते हुए मोदी को वीज़ा दे दिया था कि मोदी की यह यात्रा, उनका व्यक्तिगत दौरा है. मोदी की इस यात्रा के ख़िलाफ़ लोगों ने बड़ी तादाद में प्रदर्शन भी किया था. |
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