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गुजरात में दंगों के लिए भी सट्टा! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात में पुलिस इसकी जाँच कर रही है कि क्या बड़ौदा में संभावित दंगों और फिर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सट्टा लगाया जा रहा था? पुलिस का कहना है कि हिंदू और मुस्लिम संप्रदायों के बीच दंगा भड़कने और पुलिस कार्रवाई को लेकर सट्टा लगाए जाने की ख़बरें मिली हैं. एक तो सट्टेबाज़ी भारत में क़ानूनन जुर्म है और दूसरे गुजरात को सांप्रदायिक तनाव के मामले में बेहद संवेदनशील माना जाता है. बड़ौदा पुलिस आयुक्त दीपक स्वरुप के अनुसार ख़बरें मिली थीं कि गणेशोत्सव के दौरान इस बात को लेकर शर्तें लगाई जा रही थीं कि किसी कार्यक्रम में गड़बड़ी होगी या नहीं और इसके बाद पुलिस वहाँ आँसूगैस छोड़ेगी या नहीं. पुलिस का कहना है कि हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ लेकिन फिर भी कुछ पत्रकारों ने आँसूगैस छोड़े जाने की ख़बरें लिखीं. बीबीसी से बात करते हुए आयुक्त स्वरुप ने बताया कि इस तरह की ख़बरों से सट्टेबाज़ों के एक गुट को बहुत लाभ हुआ और उन्होंने जमकर पैसे बनाए. उनका कहना है कि गणेशोत्सव के आख़िरी दिन तो बाक़ायदा सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश भी की गई थी. |
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