| आग साज़िश का नतीजा थी:जाँच दल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात के गोधरा में फ़रवरी 2002 में हुए रेल आगज़नी कांड की जाँच कर रहे विशेष जाँच दल (एसआईटी) के प्रमुख राकेश अस्थाना ने दावा किया है कि वह घटना पूर्व नियोजित और एक साज़िश का नतीजा थी. ग़ौरतलब है कि रेल मंत्रालय द्वारा गठित जस्टिस उमेश चंद्र बैनर्जी समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा है कि साबरमती एक्सप्रेस में आग बाहर से नहीं लगाई गई थी. इस समिति ने कहा है कि आग डब्बे के भीतर ही लगी होगी और यह साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना ही दिखाई देती है और ऐसा नहीं लगता कि आग उपद्रवियों ने बाहर से लगाई थी, जैसा कि पहले सोचा गया था. 27 फ़रवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एक डब्बे में आग लग जाने से 59 लोगों की मौत हो गई थी. गुजरात के पुलिस महानिरीक्षक और जाँच दल के अध्यक्ष राकेश अस्थाना ने इन ख़बरों का खंडन किया कि साबरमती एक्सप्रेस में किसी दुर्घटना की वजह से आग लगी. राकेश अस्थाना ने कहा कि कम से कम साठ लीटर पैट्रोल डिब्बे के भीतर फेंका गया था और कपड़े के टुकड़ों में बाहर से आग लगाकर उन्हें डिब्बे के अंदर फेंका गया था जिनसे डिब्बे के भीतर आग लगी थी. अस्थाना ने कहा कि गुजरात की फ़ोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने भी पुलिस के इन जाँच तथ्यों को सही ठहराया है. ग़ौरतलब है कि पुलिस ने गोधरा रेल आगज़नी काँड के संबंध में सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया था और अब भी 75 लोग पुलिस की हिरासत में हैं. |
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