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रविवार, 17 फ़रवरी, 2008 को 09:11 GMT तक के समाचार
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'मुशर्रफ के भी हिसाब का दिन भी आएगा'

इमरान खान(फ़ाइल फ़ोटो)
क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान ने एक बार फिर राष्ट्रपित परवेज़ मुशर्रफ पर हमला बोला
क्रिकेटर से राजनेता बने तहरीक-ए-इंसाफ़ के अध्यक्ष इमरान खान ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के खिलाफ़ जमकर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि मुशर्रफ़ के हिसाब का दिन भी ज़रूर आएगा.

सूबा सरहद की राजधानी पेशावर में आल पार्टीज़ डेमोक्रेटिक मूवमेंट की एक सभा में इमरान ख़ान ने कहा, "मुशर्ऱफ ये न समझें कि उन्हें उनके क़ौमी जुर्म की सज़ा नहीं मिलेगी, उनके भी हिसाब का दिन, एक न एक दिन ज़रूर आएगा."

उन्होंने कहा, "अगर इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को फांसी हो सकती है तो फिर जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ भी फांसी के फंदे पर झूल सकते हैं."

 मुशर्रफ को भी सज़ा मिलेगी. उनके भी हिसाब का दिन ज़रूर आएगा...अगर इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को फांसी हो सकती है तो फिर जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ भी फांसी के फंदे पर झूल सकते हैं
इमरान खान, अध्यक्ष, तहरीक-ए-इंसाफ़

जनता से अपील

इस मौक़े पर तमाम नेताओं ने जनता से अपील की कि वो राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की निगरानी में होने वाले चुनाव का बहिष्कार करके देश में लोकतंत्र की बहाली, न्यायपालिका और मीडिया की आज़ादी के लिए अपना किरदार निभाएं.

इस आम सभा में अवामी नेशनल पार्टी के महमूद ख़ान अचकज़ई, जमात-ए- इस्लामी के अध्यक्ष क़ाज़ी हुसैन अहमद, तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान ख़ान, सिंध तरक्की पसंद पार्टी के अध्यक्ष क़ादिर मगसी, और बलूच नेता अब्दुल हई बलूच समेत दूसरे लोगों ने भी भाषण दिए.

संकट में है सुरक्षा

सभा को संबोधित करते हुए महमूद ख़ान अचकज़ई ने कहा, "पाकिस्तान इस वक़्त इतिहास के बदतरीन दौर से गुज़र रहा है, देश की आंतरिक स्वायत्ता और क़ौमी सुरक्षा दांव पर लगी हुई है."

उन्होंने कहा कि-"देश व्यवहारिक रूप से अमरीकी कॉलोनी में तब्दील हो चुका है. और जनता असुरक्षा का शिकार है. जबकि, कराची से लेकर बाजोड़ तक कहीं भी शांति और सुरक्षा नहीं है."

रैली में नारे लगाते लोग
रैली में लोगों से अपील की गई कि वे चुनावों का बहिष्कार कर लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ें

अचकज़ई ने कहा कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश के संविधान को ख़त्म करके सुप्रीम कोर्ट जैसे उच्च संस्थान को ख़त्म किया और अंतरिम न्यायिक आदेश के तहत शपथ न उठाने वाले 63 न्यायाधीशो को नज़रबंद किया है.

अमरीका का असर

वहीं, क़ाज़ी हुसैन अहमद ने कहा, "इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने ये जुर्म किया था कि उन्होंने एक सरकारी मुलाज़िम के राष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेने को ग़लत ठहराया था और लापता व्यक्तियों की वापसी के लिए क़दम उठाने शुरू कर दिए थे. जिसकी सज़ा वो घर पर नज़रबंदी की सूरत में भुगत रहे हैं."

उनका कहना है की देश की स्वायत्ता ख़त्म हो चुकी है और देश अमरीकी क़ैदख़ाने में तबदील हो चुका है.

जिस जगह पर ये आम सभा हो रही थी वहां सुरक्षा के बेहद कड़े इंतज़ाम रखे गए थे. सुरक्षा के मद्देनज़र ही नेताओं के बैठने का मंज भीड़ से काफी दूर बनाया गया था.

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