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बेनज़ीर की हत्याः अनसुलझी गुत्थियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़ेकार अली की बेटी और ख़ुद भी दो बार प्रधानमंत्री रह चुकीं बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की गुत्थियाँ सुलझती नज़र नहीं आ रही हैं कि उनकी हत्या किन परिस्थितियों में और किन कारणों से हुई. कराची में बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इलयास ख़ान ने बेनज़ीर भुट्टो की हत्या से जुड़े अलग-अलग दावों और चल रही जाँच की तह में जाने की कोशिश की है... अलग-अलग दावे रावलपिंडी में हुए आत्मघाती हमले के तुरंत बाद पुलिस का कहना था कि बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो हमले में बच निकलने में सफल रहीं लेकिन थोड़ी देर बात पता चला कि उन्हें रावलपिंडी के जनरल अस्पताल के आपातकालीन विभाग में उन्हें भर्ती कराया गया. डॉक्टरों की सात सदस्यों वाली टीम ने बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो की जाँच करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री को भेजी रिपोर्ट में कहा कि उनकी बाँई कनपटी के पास गहरे घाव थे और मस्तिष्क की कोशिकाओं से ख़ून रिस रहा था. रिपोर्ट में घाव के कारणों का कोई उल्लेख नहीं किया गया क्योंकि शव-परीक्षा यानी पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया. रिपोर्ट के एक दिन बाद पाकिस्तान में गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जावेद इक़बाल चीमा ने संवाददाता सम्मेलन बुलाकर कहा कि प्राथमिक जाँच से यही लगता है कि बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो की मौत सिर पर लगी चोट के कारण हुई. उनके मुताबिक बंदूकधारी हमलावर से बचने के क्रम में बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो का सिर कार की छत पर लगे दरवाज़े के हैंडल से टकरा गया था जिससे उनकी मौत हो गई. चीमा ने कहा कि बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो के शरीर पर गोली के कोई घाव नहीं थे. इस तरह के परस्पर विरोधी बयानों से इस बात को हवा मिली कि सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से बच रही है और हत्या के सही कारणों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है. बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने गृह मंत्रालय के बयानों को खारिज़ करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की गोली मार कर हत्या की गई है. पार्टी की प्रवक्ता शीरी रहमान हमले के वक़्त बेनज़ीर भुट्टो के साथ थीं. उनका कहना है कि उन्होंने अस्पताल में बेनज़ीर भुट्टो के शव को देखा था जिस पर दो घाव थे जहाँ से काफ़ी ख़ून बह रहा था. सुरक्षा को लेकर सवाल असल में पीपीपी और सरकार के बीच झगड़ा पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो को दी जाने वाली सुरक्षा और उसमें हुई ख़ामी को लेकर है.
पाकिस्तानी सरकार ने बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो से उनके जीवन पर संभावित ख़तरे के बारे में पहले ही आगाह किया था. ऐसे में सरकार किसी हालत में नहीं चाहती है कि उस पर बेनज़ीर भुट्टो को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं कराए जाने को लेकर कोई सवाल उठे. अगर पीपीपी का यह कहना सही है कि बेनज़ीर भुट्टो को बेहद नज़दीक से गोली मारकर हत्या की गई तो इससे सरकार के सारे सुरक्षा दावों की पोल खुल जाती है. आख़िर हमलावर बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो के नज़दीक पहुँचने में कैसे क़ामयाब हुए? क्या इसमें सरकार के अंदर बैठे लोगों की भी कुछ मिलीभगत थी? बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद कम से कम दो ऐसी सूचनाएँ मिली हैं जिनसे पता चलता है कि उन्हें दी गई सुरक्षा पर्याप्त नही थी. अपने एक पुराने मित्र, अमरीका के मार्क सिगल को 26 अक्तूबर को भेजे एक ईमेल में बेनज़ीर भुट्टो ने लिखा था कि वह मुशर्रफ़ के सुरक्षाकर्मियों से ख़ुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है. साथ ही सुरक्षा में सुधार के लिए बार-बार भेजी गई उनकी दरख़ास्त पर सरकार की तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं हुई. बेनज़ीर भुट्टो का कहना था कि उन्हें निजी कार इस्तेमाल करने की छूट नहीं दी गई थी. रिमोट से चालित बमों से बचने में कारगर 'जैमर' की सुविधा भी उन्हें नहीं दी गई. हादसे के बाद मिली एक वीडियो फुटेज में दिखाया गया है कि चश्मे पहने एक हमलावर बेहद नज़दीक से बेनज़ीर भुट्टो को गोली मार रहा है और सफ़ेद लिबास में दूसरे हमलावर ने इस घटना के तुरंत बाद आत्मघाती हमले को अंजाम दिया. पूरे वीडियो में घटनास्थल पर सुरक्षा बलों की कोई मौजूदगी नहीं दिखाई देती है. शव-परीक्षा क्यों नहीं? बेनज़ीर बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ ज़रदारी का कहना है कि पंजाब सूबे के गृह सचिव ने उनसे शव-परीक्षा की अनुमति माँगी थी जिसे उन्होंने ठुकरा दिया.
उन्होनें रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "हमें पता है कि ये शव-परीक्षा कैसे की जाती है और किस तरह रिपोर्ट को तोड़ा-मरोड़ा जाता है. हमें अच्छी तरह पता है कि उनकी मौत कैसे हुई." आम तौर पर पारंपरिक पाकिस्तानी समाज में महिलाओं की शव परीक्षा की अनुमति उनके रिश्तेदार नहीं देते. सवाल यह भी उठता है कि बेनज़ीर भुट्टो पर हुए हमले के तुरंत बाद घटनास्थल को आनन-फ़ानन में अग्निशामक यंत्रों की सहायता से क्यों साफ़ कर दिया गया. उधर गृह मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि जाँच अधिकारियों ने जब ज़रूरी सबूतों को इकट्ठा कर लिया तब ही घटनास्थल को साफ़ करने को कहा गया. तालेबान का हाथ? हमले के बाद गृह मंत्रालय ने पत्रकारों को दक्षिणी वज़ीरिस्तान में तालेबान समर्थक नेता बैतुल्लाह महसूद और एक अनाम चरमपंथी के बीच टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत का ब्यौरा दिया. इस टेप में दोनों 'काम' के ठीक ढंग से पूरा हो जाने की बधाई देते हुए सुने गए लेकिन उन्होंने कहीं भी अपनी इस छोटी सी बातचीत में बेनज़ीर भुट्टो का ज़िक्र नहीं किया. कई वर्ष के राजनीतिक वनवास के बाद जब बेनज़ीर भुट्टो गत अक्तूबर में पाकिस्तान लौटी थीं तो 'डेली टाइम्स' अख़बार ने बैतुल्लाह महसूद का एक वक्तव्य छापा था जिसमें वह बेनज़ीर भुट्टो को अमरीका का एजेंट बताते हुए उन्हें जान से मारने के बारे मे अपनी दृढ़निश्चय इच्छा व्यक्त कर रहे थे. हालाँकि जब 18 अक्तूबर को करांची में भट्टो के क़ाफ़िले पर हमला हुआ तब दक्षिणी वज़ीरिस्तान के उस सीनेटर ने इस तरह का कोई वक्तव्य अख़बार को देने से इनकार किया था जिनके हवाले से अख़बार ने बैतुल्लाह महसूद का वक्तव्य छापा था. बैतुल्लाह महसूद के प्रवक्ता ने घटना के तुरंत बाद गृह मंत्रालय के आरोपों को ख़ारिज करते हुए टेप को जाली क़रार दिया था और बेनज़ीर भुट्टो की हत्या का सच सामने लाने के लिए स्वतंत्र जाँच कराए जाने की माँग भी की. | इससे जुड़ी ख़बरें बेनज़ीर के जीवन का सफ़र 27 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर भुट्टो के आख़िरी क्षणों का नया वीडियो31 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बाल-बाल बचीं बेनज़ीर, सुरक्षा कड़ी18 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था18 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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