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गुरुवार, 07 जून, 2007 को 12:45 GMT तक के समाचार
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कोलंबो से निकाले जा रहे हैं तमिल
तमिल
आजीविका की तलाश में आए तमिल सस्ते होटलों में रुकते हैं
श्रीलंका की पुलिस ने राजधानी कोलंबो से सैकड़ो तमिल लोगों को बाहर कर दिया है. पुलिस का कहना है कि वे यहाँ तमिल विद्रोहियों को घुसने से रोकना चाहते हैं.

अधिकारियों ने राजधानी के उन सस्ते होटलों को निशाना बनाया जहाँ काम के सिलसिले में आने वाले तमिल रुकते हैं. क़रीब 400 तमिलों को ज़बरदस्ती एक बस में भरकर उनके गाँव भेजा गया.

इन तमिलों के गाँव देश के पूर्वोत्तर में स्थित हैं जहाँ एलटीटीई और सरकारी सेना के बीच संघर्ष चल रहा है. पुलिस का कहना है कि कोलंबो में रहने के लिए इन तमिलों के पास कोई उपयुक्त कारण नहीं है.

ये क़दम ऐसे समय उठाया गया है जब पिछले कुछ महीनों में राजधानी कोलंबो में कई बम धमाके हुए हैं. पुलिस ने दावा किया है कि तमिल विद्रोहियों के साथ बातचीत करके इन तमिल लोगों को वापस उनके गाँव भेजने के लिए व्यवस्था की गई है.

 ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें कई लोग छह महीने से ज़्यादा समय से कोलंबो में रह रहे हैं और बहाना ये बनाते हैं कि वे अपना परिचय पत्र या पासपोर्ट बनवाने के लिए यहाँ आए हैं
सरकारी बयान

पुलिस का कहना है कि देश में गृह युद्ध की बढ़ती आशंका के बीच ये क़दम उठाना ज़रूरी है. पुलिस का ये भी कहना है कि तमिल समुदाय की सुरक्षा के लिए ये क़दम उठाए जा रहे हैं.

सरकार की ओर से भी इस बारे में एक बयान जारी किया गया है. बयान के मुताबिक़ ये क़दम जातीय आधार पर नहीं उठाए गए हैं. बयान के मुताबिक़ ये क़दम उन सभी लोगों के ख़िलाफ़ उठाए जा रहे हैं जो बेवजह कोलंबो में रह रहे हैं.

बयान

बयान में कहा गया है- "ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें कई लोग छह महीने से ज़्यादा समय से कोलंबो में रह रहे हैं और बहाना ये बनाते हैं कि वे अपना परिचय पत्र या पासपोर्ट बनवाने के लिए यहाँ आए हैं."

तमिलों ने उत्पीड़न का आरोप लगाया है

सरकार का ये भी कहना है कि कोलंबो में हुए कई धमाकों की साज़िश इन्हीं छोटे-छोटे सस्ते होटलों में रची गई थी. बयान के मुताबिक़ कुल 376 लोगों को उनके गाँव भेजा गया. इनमें 291 पुरुष और 85 महिलाएँ हैं.

एलटीटीई की ओर से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन तमिल राजनेता धर्मलिंगम सिथदतन ने अपनी नाराज़गी जताई है.

उन्होंने कहा, "यह बहुत ग़लत उदाहरण है. तमिल विद्रोहियों के लिए तो यह ठीक है जो जातीय संहार में विश्वास करते हैं और उनकी कोई नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं है. लेकिन सरकार को तो ऐसे व्यवहार नहीं करना चाहिए."

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि सैकड़ो तमिल काम की तलाश में कोलंबो आते हैं और सस्ते होटलों में ठहरते हैं.

कई तमिल लोगों का कहना है कि उन्हें जान-बूझकर निशाना बनाया जा रहा है. उनकी शिकायत है कि सुरक्षाकर्मी उन्हें हिरासत में लेकर उनकी तलाशी लेते हैं.

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