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मुशर्रफ़ को प्रेस की आज़ादी पर चिट्ठी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के नाम लिखी गई एक खुली चिट्ठी में पाकिस्तान में मीडिया की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई है. ह्यूमन राइट्स वॉच की चिट्ठी इस पंक्ति से शुरू होती है - डियर जनरल मुशर्रफ़, पाकिस्तान सरकार द्वारा मीडिया का मुँह बंद करने के लिए की जा रही कोशिशों और उनकी संख्या में आती तेज़ी से ह्यूमन राइट्स वॉच चिंतित है. आज टेलीविज़न चैनल को चुप कराने की कोशिश, जियो टीवी पर हमला, डॉन अख़बार पर डाला गया अनुचित दबाव और देश के कई हिस्सों में पत्रकारों के साथ मार-पीट की घटनाएँ मीडिया पर हमलों के कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिसकी जानकारी सबको है. स्वतंत्र निगरानी संगठन, जैसे रिपोर्टर्स सॉं फ्रंतिएर, लगातार आपकी सरकार के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता के लगातार हो रहे हनन पर दस्तावेज़ जारी करते रहे हैं. चिट्ठी आगे कहती है कि आपकी सरकार लगातार ये दावे करती रही है कि पाकिस्तान में मीडिया “अभूतपूर्व” स्वतंत्रता का आनंद ले रही है लेकिन ये केवल उन्हीं पत्र-पत्रिकाओं या टीवी चैनलों तक सीमित है जो आपकी सरकार और विशेष रूप से आपका समर्थन करते हैं. अंग्रेज़ी मीडिया, जिसकी पहुँच राजनयिकों और बाहरी दुनिया तक है, सरकार की आलोचना करने के मामले में उर्दू मीडिया की तुलना में अधिक स्वतंत्र है. इसी प्रकार से टीवी-रेडियो जैसे प्रसारण माध्यमों को प्रकाशन माध्यमों की तरह आज़ादी नहीं मिलती क्योंकि उनकी पहुँच अधिक होती है. बीबीसी पत्रकार का उदाहरण चिट्ठी कहती है कि 1999 में हुए तख़्तापलट के बाद से पाकिस्तान सरकार ने क्रमबद्ध तरीके से पत्रकारों के मौलिक अधिकारों का हनन किया है, कभी धमकी मिली, कभी लोगों को परेशान किया गया, कभी लोग बे-बात गिरफ़्तार कर, तो कभी लोग अचानक लापता हो गए. ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी चिट्ठी में सिलसिलेवार तरीक़े से नाम-जगह-तारीख़ के साथ ऐसी घटनाओं का ब्यौरा दिया है. इनमें बीबीसी उर्दू सेवा के संवाददाता दिलावर ख़ान के साथ हुई घटना का भी ज़िक्र है और कहा गया है कि नवंबर 2006 में पाकिस्तान के गुप्तचर संगठन आईएसआई के एजेंटों ने दिलावर ख़ान को कई घंटे तक अगवा करके रखा और धमकियाँ दीं. ह्यूमन राइट्स वॉच ने विशेषज्ञों द्वारा 1995 में तय और संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित जोहानसबर्ग सिद्धांतों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को याद दिलाया है कि पत्रकारों को जानकारियाँ जुटाने के लिए घूमने-फिरने का अधिकार है. लेकिन पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान, पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में इन सिद्धांतों की लगातार अवहेलना की है. अंत में ह्मयूमन राइट्स वॉच ने परवेज़ मुशर्रफ़ से आग्रह किया है कि वे देश में मीडिया की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्धता दिखाएँ. अंत में परवेज़ मुशर्रफ़ को धन्यवाद देते हुए चिट्ठी इस बारे में उनसे जवाब मिलने की उम्मीद के साथ समाप्त हो जाती है. |
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