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'पाकिस्तान ने 500 तालेबान को पकड़ा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान ने कहा है कि उसने इस वर्ष 500 से ज़्यादा तालेबान चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया और ज़्यादातर को अफ़ग़ानिस्तान सरकार के हवाले कर दिया. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा की घटनाओं में आई तेज़ी के कारण दोनों पड़ोसी देशों के बीच बेहतर सुरक्षा सहयोग की आवश्यकता है. इस सप्ताह अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया था कि वह चरमपंथियों को पनाह दे रहा है और उनका सहयोग कर रहा है. उन्होंने कहा था कि इसी कारण अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा की घटनाएँ बढ़ रही हैं. सिर्फ़ इसी वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में 3500 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. लेकिन पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा, "सिर्फ़ इसी वर्ष क्वेटा और अन्य शहरों से 500 से ज़्यादा तालेबान विद्रोही पकड़े गए." पहल विदेश मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तान ने इन गिरफ़्तार तालेबान विद्रोहियों में से 400 से ज़्यादा को अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले कर दिया. अफ़ग़ानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तानी प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से तालेबान नेताओं ने कई हमलों की साज़िश रची थी. एक समय पाकिस्तान तालेबान का समर्थक था लेकिन अमरीका पर 11 सितंबर को हुए हमलों के बाद उसने अमरीका का साथ दिया और 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' में उसका प्रमुख सहयोगी बना. पाकिस्तान सरकार ने इसका खंडन किया कि वह तालेबान चरमपंथियों को सहयोग दे रही है. अधिकारियों ने कहा कि सैकड़ों की संख्या में पाकिस्तानी सैनिक तालेबान चरमपंथियों से संघर्ष में मारे गए हैं. पाकिस्तान का ये भी कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा की वजह वहीं है. हालाँकि हाल ही में चरमपंथियों और सरकार के बीच हुए समझौते को अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका में संदेह की नज़र से देखा जा रहा है. |
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