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'पाकिस्तान अपने वायदे पर अमल करे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ सार्थक बातचीत के लिए ज़रूरी है कि वह 'आतंकवाद ख़त्म करने के वायदे पर अमल करे.' मनमोहन सिंह कश्मीर मसले पर चर्चा के लिए मंगलवार से शुरू हुए तीसरे गोलमेज़ सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हो रही इस चर्चा में भारत प्रशासित कश्मीर की डेमोक्रैटिक लिबरेशन पार्टी, नेशनल कॉंफ़्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी और लद्दाख हिल डेवलपमेंट काउंसिल के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. लेकिन अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के उदारवादी और कट्टरपंथी दोनों धड़े गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार कर रहे हैं. सुरक्षा बलों की तैनाती अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "कश्मीर समस्या के दो पहलू हैं, पहला आंतरिक और दूसरा बाहरी. हम दोनों मोर्चे पर आगे बढ़ रहे हैं. हमारी कोशिश है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का जीवन स्तर उठाने के लिए व्यावहारिक क़दम उठाएँ." बाहरी पहलू को पाकिस्तान से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिशा में भी प्रगति हो रही है. उनका कहना था, "हम सभी मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं लेकिन ये प्रयास तब तक सार्थक नहीं होंगे जब तक शांतिपूर्ण माहौल तैयार नहीं होता. पाकिस्तान को चाहिए कि वो आतंकवाद ख़त्म करने के अपने वायदे को अमली जामा पहनाए." मनमोहन सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की तैनाती वहाँ के ज़मीनी हालात के मुताबिक तय होगी. उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने जम्मू-कश्मीर के लोगों पर गहरे घाव छोड़े हैं और केंद्र सरकार इसे मिटाने की कोशिश कर रही है. प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार योजना आयोग के साथ मिलकर राज्य के विकास के लिए खाका तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले गोलमेज सम्मेलन के बाद आर्थिक विकास और सुशासन समेत पाँच पहलुओं पर समितियाँ गठित की गई थी जिनमें से चार ने अपनी सिफ़ारिशें दे दी हैं और सम्मेलन के दौरान इन पर चर्चा की जाएगी. गोलमेज सम्मेलन भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के उदारवादी और कट्टरपंथी दोनों धड़े गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार कर रहे हैं. नई दिल्ली में हो रहे इस सम्मेलन के दौरान कश्मीरी नेताओं का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ संवाद हो रहा है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद कह चुके हैं कि सम्मेलन में आर्थिक विकास, सुशासन और पाकिस्तान के साथ विश्वास का माहौल बढ़ाने पर बल दिया जाएगा. हुर्रियत के अलावा डेमोक्रैटिक फ़्रीडम पार्टी के नेता शब्बीर शाह और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के नेता यासीन मलिक भी सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. दूसरी ओर डेमोक्रैटिक लिबरेशन पार्टी, नेशनल कॉंफ़्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी और लद्दाख हिल डेवलपमेंट काउंसिल के प्रतिनिधि इसमें हिस्सा ले रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें गोलमेज सम्मेलन पर टिकी निगाह14 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'फ़र्जी मुठभेड़' मामले में आरोप पत्र12 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'चरमपंथियों को वार्ता में शामिल करें'07 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'फ़र्ज़ी मुठभेड़ों' की जाँच के लिए आयोग02 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस कश्मीर में पाँच हिंदू मज़दूरों की हत्या30 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस कश्मीर से सेना वापसी पर विवाद28 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर साझा तंत्र का हिस्सा हो'26 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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