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शनिवार, 14 अप्रैल, 2007 को 19:04 GMT तक के समाचार
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गोलमेज सम्मेलन पर टिकी निगाह

ग़ुलाम नबी आज़ाद
मुख्यमंत्री का कहना है कि इस बार ठोस प्रगति हो सकती है
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि कश्मीर पर तीसरा गोलमेज सम्मेलन 24 अप्रैल को दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में होगा.

इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और बुद्धीजिवी भाग लेंगे. मुख्यमंत्री ने बीबीसी को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण होगा.

जम्मू में बीनू जोशी ने इसी मुद्दे पर बात की मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद से. पेश हैं इसके मुख्य अंश.

तीसरे गोलमेज सम्मेलन को किन कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

मेरे ख़याल से आर्थिक, सियासी और सामाजिक तौर पर यह गोलमेज सम्मेलन ज़रूरी है. पहले गोलमेज सम्मेलन तो औपचारिक रहा लेकिन दूसरा सम्मेलन कुछ असरदार रहा और उसमें तमाम सियासी पार्टियों ने अच्छे मशविरे दिए थे. उन तमाम सुझावों को किस तरह असली शक्ल दी जाए, इसलिए जो आर्थिक मसले थे उनके लिए आर्थिक कमेटी बनाई, जो प्रशासनिक सवाल उठाए गए उसके लिए प्रशासनिक कमेटी बनाई, जो राजनीतिक बातें उठी उनके लिए राजनीतिक कमेटी बनाई गई, सामाजिक मसलों के लिए अलग कमेटी बनी. इस तरह से पाँच अलग-अलग समितियाँ बनाई गईं जिनमें सभी राजनीतिक पार्टियों के नुमाइंदों को रखा गया और इनके चेयरमैन राज्य से बाहर के थे जैसी की माँग की गई थी.

इस बैठक से क्या ख़ास उभर कर सामने आने की उम्मीद है?

इन पाँचों समितियों में से चार समितियों की रिपोर्ट मुझे और गृहमंत्री को मिल चुकी है तो इस गोलमेज सम्मेलन में जो लोगों ने मशविरे दिए थे, उसको अमलीजामा पहनाया जाएगा, उसे असली शक्ल दी जाएगी.इसलिए राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है यह.

पिछले दो सम्मेलनों में अलगाववादी हुर्रियत कॉंफ़्रेंस ने हिस्सा नहीं लिया. इस बार क्या उम्मीद है?

हम तो बार-बार कहते हैं कि हुर्रियत जब भी मन चाहें गोलमेज सम्मेलन में शामिल हों या कार्यकारी समूहों में भागीदार बनें. मुझे यकीन है कि जिस तरह से दूसरी सियासी पार्टियाँ चाहती हैं कि रियासत के सियासी हालात ठीक हो जाएँ, उसी तरह हुर्रियत के लोग भी यही चाहते हैं लेकिन बाहर रहके कुछ निकलेगा नहीं. जहाँ फ़ैसला होना है अगर वहाँ वे नहीं बैठेंगे तो बात क्या निकलेगी. मैं अब भी चाहूँगा कि वो आयें और गोलमेज सम्मेलन में शिरकत करें.

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