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बच्चों के 'अपहरण' की आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों का आहवान किया है कि वे बच्चों को सैनिक के तौर पर भर्ती करने और लड़ाई में उनका इस्तेमाल करना तुरंत रोकें. यह आहवान तमिल टाइगर विद्रोहियों और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम संगठन से अलग हुए करूणा गुट दोनों से ही किया गया है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने श्रीलंका सरकार से भी यह अनुरोध किया है कि वह इन दावों की जाँच-पड़ताल करे कि कुछ बच्चों का अपहरण करने में सुरक्षा बलों के कुछ जवानों का भी हाथ रहा है. जबकि सरकार ने करुणा गुट के साथ कोई मिलीभगत होने से इनकार किया है. तमिल टाइगर विद्रोहियों ने दिसंबर 2006 में स्वीकार किया था कि उन्होंने देश के पूर्वी हिस्से से 21 छात्रों को उठाया था. ह्यूमन राइट्स वॉच ने श्रीलंका के पूर्वी हिस्से में क़रीब 20 परिवारों से बातचीत की और उसका कहना है कि उसे ऐसे सबूत मिले कि बड़े पैमाने पर बच्चों का अपहरण इसलिए होता है कि उन्हें लड़ाकों के तौर पर तैयार किया जा सके. मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि पूर्वी हिस्से में जैसे-जैसे लड़ाई तेज़ हुई है, ऐसी संभावना है कि करूणा गुट ने सैकड़ों युवाओं का अपहरण कर लिया होगा. करूणा गुट तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई से 2004 में अलग हो गया था. इसके नेता का नाम कर्नल करूणा बताया जाता है और कर्नल करूणा ने इन आरोपों का खंडन किया है कि उनके लड़ाकों में कोई बच्चा भी है. 'मिलीभगत' ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि कुछ बच्चों के अपहरण में श्रीलंका के सुरक्षा बलों के कुछ तत्वों का भी हाथ रहा है. मानवाधिकार संगठन के अनुसार अगवा किए गए बच्चों के परिवारों ने कहा है कि उन बच्चों का अपहरण सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़ों से किया गया और उनमें से कुछ इलाक़े तो सुरक्षा बलों की चौकी के काफ़ी नज़दीक थे. श्रीलंका के सुरक्षा बलों ने करूणा गुट से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है. सरकार के रक्षा प्रवक्ता काहिलिया रम्बूक्वेला ने कहा कि अधिकारियों के सामने जो मामले लाए गए हैं उनकी समुचित जाँच कराई जाएगी. ह्यूमन राइट्स वॉच ने तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई की भी आलोचना की है. उन पर आरोप है कि दशकों से जारी लड़ाई में वे बच्चों का अपहरण करके लड़ाई में उनका इस्तेमाल करते रहे हैं और ऐसा अब भी जारी है. मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि दिसंबर 2006 में विद्रोहियों ने एक ट्यूशन केंद्र से 21 लड़के और लड़कियों को अगवा कर लिया था हालाँकि काफ़ी बवाल उठने के बाद उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया था. तमिल विद्रोहियों ने कहा था कि उनके संगठन के कुछ कनिष्ठ सदस्यों ने ग़लती से ऐसा कर दिया था. ह्यूमन राइट्स वॉच ने एलटीटीई और करूणा गुट दोनों का ही आहवान किया है कि अगर उनके संगठन में कोई बच्चे हैं तो उन्हें उनके परिवारों को वापस लौटाने के लिए यूनीसेफ़ के साथ सहयोग करें. श्रीलंका में साल 2006 में हिंसा में काफ़ी तेज़ी आई और अधिकारियों के अनुसार इस लड़ाई में कम से कम 3400 लोग मारे गए. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में बम धमाका, 15 की मौत06 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में बम विस्फोट, पाँच की मौत05 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में विद्रोही ठिकानों पर बमबारी02 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका को जर्मनी से मदद रूकी25 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में सीधा हस्तक्षेप नहीं-प्रणव22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस विद्रोहियों ने 24 बच्चों को 'अगवा' किया19 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोही नेता बालासिंघम का निधन14 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका की स्थिति से संयुक्त राष्ट्र चिंतित12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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