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श्रीलंका को जर्मनी से मदद रूकी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी ने कहा है कि वह श्रीलंका को दी जा रही मदद रोक रहा है. श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच लड़ाई को देखते हुए ये क़दम उठाया गया है. जर्मनी के 'ओवरसीज डेवलपमेंट' मंत्री हीदमायर वीज़ोरेक ज़्योल ने कहा कि सहायता जिन लोगों के लिए थी वहाँ पहुँच नहीं पा रही है, इसलिए इसे सहायता जारी रखने का कोई मतलब नहीं है. जर्मनी ने वर्ष 2004 में आए विनाशकारी सुनामी से प्रभावित लोगों के लिए सहायता देना शुरू किया था. लेकिन इस वर्ष के शुरू से ही तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई और सेना के बीच संघर्ष तेज़ होने के कारण विस्थापितों को सहायता नहीं मिल पा रही है. दोनों पक्षों के बीच जारी संघर्ष में इस साल तीन हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. जर्मनी की चिंता हीदमायर ने एक अख़बार को बताया कि विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में रह रहे सुनामी पीड़ितों तक सहायता पहुँचाना मुश्किल हो गया है. सुनामी से श्रीलंका में 30 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे और पाँच लाख से ज़्यादा बेघर हो गए. सितंबर में सुयक्त राष्ट्र ने भी कहा था कि आंतरिक लड़ाई के कारण सुनामी प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निमाण कार्य सुस्त गति से चल रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में सीधा हस्तक्षेप नहीं-प्रणव22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस विद्रोहियों ने 24 बच्चों को 'अगवा' किया19 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्ष के कारण हज़ारों ने पलायन किया10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में नए आपातकाल प्रावधान 06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस रक्षा सचिव पर हमला: दो गिरफ़्तार03 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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